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प्यार के सप्ताह में भी फूलों को नहीं मिल रहा बाजार, रंग-बिरंगे फूलों का उत्पादन करने वाली महिला किसानों में खासा मायूसी

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 9:15:09 PM

लोहरदगा (LOHARDAGA) : पूजा की थाली से लेकर प्रेम के इज़हार तक फूलों की मांग रहती हैं. लेकिन अपने सपनों को पसीने से सींचने वाले किसान आज बाज़ार नहीं मिलने की वजह से धाराशाही हो रहे हैं. वैलेंटाइन डे को लेकर इन दिनों युवाओं में फूलों के लिए जहां एक ओर रूझान पूरी तरह से बढ़ा रहता है. वहीं दूसरी ओर कुडू प्रखंड क्षेत्र में जरबेरा फूल की खेती करने वाली महिलाओं के सामने बाज़ार को लेकर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं. सही बाजार नहीं होने की वजह से इनके खेत में ही इनके फूल दम तोड़ दे रही है.

बाजार नहीं मिलने से मायूस हैं महिलाएं

फूलों की खेती करने वाली महिलाओं का कहना है कि जिला उद्यान विभाग की ओर से फ्लोरीकल्चर की ओर इन लोगों ने कदम तो बढ़ाया. लेकिन इनके सामने बाज़ार की समस्या उत्पन्न हो गई है. अब इन महिलाओं को बाजार से सहयोग की उम्मीद है. ताकि हजारों की पूंजी और लाखों रुपए का नुक़सान इन्हें न हो. महिलाएं अपने खेतों में इन फूलों की मुस्कुराहट से खिल उठती हैं लेकिन इसी जमीं पर इन्हें मुरछाते हुए देख इनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है. इनकी उम्मीदें अब प्यार के इस मौसम में भी जवां नहीं हो पा रही है.

सहयोग देने का आश्वासन

लोहरदगा जिला के विभिन्न क्षेत्रों में फूलों की खेती व्यापक रूप से की जा रही है. लेकिन किसानों को प्रोत्साहन के साथ-साथ बाज़ार नहीं मिलने की वज़ह से अब ये उदास हो रहे हैं. लोहरदगा डीसी के द्वारा ऐसे किसानों को बाज़ार और सहयोग देने का रटा रटाया जवाब दिया जा रहा है.

उम्मीदों को पंख का इंतजार

लोहरदगा जिला के किसान जिला को एक पहचान देने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. लेकिन परिस्थितियां ऐसी उत्पन्न हो रही है कि पहचान के बजाय किसान दुबारा इस ओर आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं,. अब देखना है कि दम तोड़ती उम्मीदों को पंख कहां से मिलती है. और इन किसानों को बाज़ार और अन्य सुविधाएं कब तक प्राप्त हो पाती है. या फिर ये ऐसी ही परिस्थितियों के साथ निराश रहने को विवश न हो जाए.


रिपोर्ट : गौतम लेनिन,लोहरदगा  

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