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झारखंड में एक बार फिर 1932 खतियान आधारित स्थानीयता की बह सकती है हवा, पढ़िए क्यों 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 10:27:46 AM

धनबाद(DHANBAD):  झारखंड में एक बार फिर 1932 खतियान आधारित स्थानीयता की हवा बह  सकती है. राजनीति गरमा सकती है. सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में मुखयमंत्री हेमंत सोरेन जहां भी जा रहे है ,विधेयक को फिर से पेश करने का ऐलान कर रहे है.  राज्यपाल ने इस विधायक को पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया है.  झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष ने शुक्रवार को बताया कि राज्यपाल ने 1932 खतियान आधारित स्थानीयता संबंधित विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया है.  विधानसभा अध्यक्ष ने राजभवन सचिवालय से प्राप्त संदेश को पढ़कर सुनाया.  संदेश में राज्यपाल ने उल्लेख किया है कि भारत के अटॉर्नी जनरल की कानूनी और संवैधानिक राय के अनुसार विधेयक  को पुनर्विचार के लिए लौटाया जा रहा है. 

विधेयक की धारा 6 (ए )संविधान के अनुच्छेद- 14 और अनुच्छेद 16(2) का उल्लंघन कर सकती है
 
इसमें कहा गया है कि यह विधेयक की धारा 6 (ए )संविधान के अनुच्छेद- 14 और अनुच्छेद 16(2) का उल्लंघन कर सकती है.   संदेश में कहा गया है कि वर्तमान विधेयक   से राज्य सरकार के तहत वर्ग 3 और वर्ग 4 के पदों पर नियुक्तियां केवल स्थानीय व्यक्तियों के लिए आरक्षित होंगी.  ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार के तहत तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी पदों पर आवेदन करने से स्थानीय व्यक्तियों के अलावा अन्य व्यक्तियों को अवसर नहीं देना संविधान के अनुरूप नहीं होगा.  अध्यक्ष ने राज्यपाल के संदेश को आगे पढ़ा और कहा कि  संवैधानिक रूप से सुरक्षित तरीका चतुर्थ श्रेणी के पदों को केवल स्थानीय व्यक्तियों के लिए सुरक्षित करने पर विचार किया जा सकता है.  लेकिन इसकी समीक्षा 5 साल के बाद की जाए.  

सरकार के पास चालू सत्र  में पेश करने का अवसर 

अब सरकार के पास चालू सत्र  में इसे दोबारा पेश करने का अवसर है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के मंच से 1932 खतियान आधारित विधेयक को फिर से लाने का ऐलान किया है.  सूत्र बताते हैं कि सरकार विधानसभा के इसी शीतकालीन सत्र में विधेयक को फिर पेश करने पर विचार कर सकती है.  झारखंड में 1932 खतियान आधारित स्थानीयता   लंबे समय से राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है.रघुवर सरकार में  स्थानीयता की नीति बनी लेकिन इसका विरोध भी हुआ.  विधानसभा से इसके पहले जब 1932 खतियान आधारित स्थानीयता को  पास किया गया था, तो पूरे राज्य में जश्न का माहौल बन गया था.  झारखंड की गठबंधन ने  इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मानी थी.  लेकिन राज्यपाल ने इसे पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया है. अब देखना होगा कि आगे- आगे होता है क्या. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

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