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बीसीसीएल के 16000 से अधिक क्वार्टर क्यों तोड़े जाने वाले हैं, जानिये इसका झरिया की भूमिगत आग से कनेक्शन

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 2:56:26 AM

धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल में कोयला खनन का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही पुराना इतिहास भूमिगत आग का भी है. झरिया क्षेत्र में 1916 में पहली बार आग का पता चला था और उसके बाद से ही जमीन के भीतर बेशकीमती कोयला जल रहा है.  अब तक के जितने प्रयास हुए या किए जा रहे हैं, उसके बहुत अच्छे परिणाम नहीं निकले.  अब आईआईटी आईएसएम आग बुझाने के तरीके पर काम कर रहा है.  शुक्रवार को आईआईटी आईएसएम के डायरेक्टर ने साफ कहा कि नाइट्रोजन से ही भूमिगत आग को बुझाया जा सकता है.  देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है. 

झरिया पुनर्वास की ऑनलाइन समीक्षा कोयला सचिव ने की 

बता दें कि 12 साल में लगभग ग्यारह सौ करोड़  रुपए से अधिक खर्च करने के बाद भी झरिया पुनर्वास के नाम पर आंकड़ों के मुताबिक 2676 परिवारों को ही शिफ्ट किया जा सका है. 12 साल की अवधि में झरिया के पुनर्वास में बीसीसीएल , जेआरडीए विफल रहा है.  बेलगड़िया में 18000 आवास तैयार अथवा निर्माणाधीन है, इनमें अब तक 2676 परिवारों का पुनर्वास हो पाया है.  बाकि  लोग शिफ्टिंग में आनाकानी कर रहे हैं.  आंकड़े के मुताबिक 12000 आवास निर्माण की प्रक्रिया में हैं.  अगस्त 22 तक इनके पूरे होने की उम्मीद की जा रही है.   इधर शुक्रवार को झरिया पुनर्वास की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में कोयला सचिव ने बीसीसीएल प्रबंधन को आदेश दिया कि भूमिगत और प्रभावित क्षेत्र में बीसीसीएल के 16000 से अधिक क्वार्टरों को जल्द ही ध्वस्त कर दिया जाये.  सचिव ने ऑनलाइन बैठक में यह भी कहा कि असुरक्षित क्षेत्र में मौजूद घरों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाये.  पुनर्वास के लिए आवास उपलब्ध होने के बाद भी प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगो का  पुनर्वास नहीं होने से होने पर सचिव ने चिंता जताई. 

24 अगस्त को झरिया पुनर्वास पर दिल्ली में बड़ी बैठक
 
जानकारी के अनुसार 24 अगस्त को झरिया पुनर्वास पर दिल्ली में बड़ी बैठक होने वाली है.  इससे पहले कोयला सचिव द्वारा पुनर्वास पर समीक्षा किया गया है.  ऑनलाइन बैठक में धनबाद के डीसी सह  जेआरडीए के प्रबंध निदेशक संदीप सिंह, बीसीसीएल सीएमडी समीरण दत्ता , निदेशक तकनीकी संजय कुमार सिंह शामिल थे.   बता दें कि बीसीसीएल को मास्टर प्लान के तहत 25,000 कंपनी क्वार्टरों को तोड़ना था , मास्टर प्लान की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी 16 हजार से अधिक क्वार्टर बचे है.  इन क्वार्टरों में बहुत कम में ही बीसीसीएल कर्मी रहते हैं, अधिकतर आवासों पर अवैध कब्जा है.  यही कारण है कि अब तक आवास खाली कराए नहीं जा सके हैं  और न तोड़े जा सके हैं.  

 

 

Tags:News

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