धनबाद(DHANBAD): लगता है धनबाद की सिटी सेंटर से बरवा अड्डा तक जाने वाली मुख्य सड़क की समस्या अभी खत्म नहीं होगी. रानीबांध तालाब के पास सड़क पर जमा पानी अभी बदबू देता रहेगा. अस्थाई सफाई भले निगम कर दे लेकिन इसका स्थाई हल निकलना अभी दूर की कौड़ी है. पूरा मामला रांची में फंसा हुआ है. रांची जब तक इसको क्लीयरेंस नहीं देगा, तब तक स्थितियां यूं ही बनी रहेगी. धनबाद के 2 विभागों ने इस सड़क को सुधारने के लिए अलग-अलग योजनाएं बनाई हैं. लेकिन दोनों योजनाएं रांची में अटकी पड़ी है. नगर निगम ने रानी बांध के समीप नाली निर्माण के लिए 88 लाख का टेंडर निकाला है. टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है .लेकिन काम आवंटित करने के लिए नगर विकास विभाग को संचिका भेजी गई है. एक माह से यह रांची में पड़ी हुई है.
जलजमाव का नहीं निकला समाधान
दूसरी ओर पथ निर्माण विभाग ने भी वहां सड़क मरम्मत की योजना बनाई है. लगभग 18 करोड़ की लागत से सिटी सेंटर से बरवा अड्डा तक सड़क मरम्मत का टेंडर किया गया है. आगे की प्रक्रिया अभी रांची में अटकी हुई है. लगता है कि जलजमाव समाधान का मामला अभी यूं ही पड़ा रहेगा. 2 दिन पहले नगर निगम ने जलजमाव को वहां से हटाया था. लेकिन 50 घंटे बाद फिर वही स्थिति हो गई .नाले के पानी को परमानेंट हटाने की योजनाएं सरकारी प्रक्रिया में फंसी है. लोग पिछले एक साल से यह समस्या झेल रहे हैं. मंगलवार को तो सड़क के किनारे होल में एक भैंस गिर गई थी. संयोग अच्छा था कि नजर लोगों की पड़ी और कड़ी मशक्कत के बाद भैंस को निकाल लिया गया.
लोगों में आक्रोश
लोग बताते हैं कि आइएस एम कैंपस से आने वाला गंदा पानी को पहले रानी बांध तालाब में डाला जाता था. स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया. इस नाले को बंद कर दिया. फिलहाल आइएसएम से निकलने वाला गंदा पानी मेन ड्रेन में गिर तो रहा है लेकिन नाले का डिजाइन ऐसा है कि वह एक जगह पर जमा हो रहा है. इस समस्या के समाधान के लिए ही नगर निगम और पथ निर्माण विभाग ने अलग-अलग योजनाएं बनाई है. लेकिन लगता है कि इस योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया इतनी अधिक पेचीदा है कि यह केवल संचिका की शोभा ही बढ़ा सकता है. जलजमाव को लेकर लोग आक्रोशित हो गए हैं. 4 दिन पहले जमा पानी के बीच बैठकर लोगों ने नारेबाजी की, पत्राचार किया .तब नगर निगम की नींद टूटी और मशीन लगाकर पानी को साफ किया गया. लेकिन उसके दूसरे दिन ही बारिश हो गई और स्थिति फिर पहले जैसी ही हो गई.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह
