दुमका(DUMKA):दुमका के विजयपुर में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की ओर से आलीशान भवन बनाया गया है. यह भवन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में छात्रों के बीच शिक्षा का अलख जगाने के लिए बना है. जिसमें महाविद्यालय का संचालन होता है. नाम दिया गया है मॉडल डिग्री कॉलेज. नाम भले ही मॉडल दिया गया हो लेकिन शिक्षा व्यवस्था मॉडल नहीं है. कॉलेज का उद्घाटन भी लगभग एक वर्ष पहले हो चुका है. लेकिन कॉलेज में अब तक सही तरीके से पढ़ाई शुरू नही हो सकी है.
कॉलेज में छात्रों के बैठने के लिए बेंच डेस्क तक नहीं
शिक्षकों के पद सृजन के साथ साथ कर्मी की भी बहाली नहीं हो पायी है. शानदार भवन में संचालित मॉडल डिग्री कॉलेज शिक्षा के नाम पर शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. मॉडल डिग्री कॉलेज के में छात्रों के बैठने के लिए बेंच डेस्क की समुचित व्यवस्था नहीं है.
विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी की वजह से पढ़ाई बाधित है
इस बाबत पूछे जाने पर सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो डॉ सोना झरिया मिंज कहती है. कि किसी भी कॉलेज के लिए बिल्डिंग का महत्व कम होता है. महत्व है शिक्षण का. शांति निकेतन इसका उदाहरण है. झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी है. इस कमी को दूर करना नितांत आवश्यक है. दुमका में मॉडल डिग्री कॉलेज का स्ट्रक्चर है, फर्नीचर भी होनी चाहिए. ताकि छात्रों को बैठा कर पढ़ाया जा सके. उन्होंने कहा कि फर्नीचर क्रय की प्रक्रिया में है. उम्मीद है कि जल्द हो कॉलेज में फर्नीचर आ जाए. उन्होंने उम्मीद जताया की सत्र 2023 - 24 से नियमित पढ़ाई होगी.
शोभा की वस्तु बनकर रह गई है बिल्डिंग
सवाल उठता है कि जब कुलपति भी मान रही है, कि कॉलेज में बिल्डिंग का महत्व नहीं बल्कि शिक्षण का महत्व है. तो फिर बगैर शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त किए बिल्डिंग बनाने का क्या फायदा?.अब जब भवन बन गया और उसका उद्घाटन भी हो गया है. तो यहां की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना हम सबों की सामूहिक जिम्मेदारी है. तभी यहां के छात्रों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और कॉलेज का नामकरण सार्थक होगा.
रिपोर्ट: पंचम झा
