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कोयलांचल में बारिश का साइड इफेक्ट हुआ तेज, जानिए कितने सुरक्षित हैं कोलियरी इलाके 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 3:46:44 AM

धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल में बारिश का साइड इफेक्ट तेज हो गया है. थापरनगर ,सिजुआ ,लोदना के बाद  गुरुवार कि सुबह बीसीसीएल की बसंती माता दहीबाड़ी  परियोजना के पास तेज आवाज के साथ जमीन फट गई.  हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन वहां खड़ी एक ड्रिल मशीन जमीन में समा गई.  यह  घटना सुबह 4:40 पर हुई बताई गई है. गनीमत थी कि  उस समय वाहन पर चालक नहीं  था. बड़े भूभाग में दरार आने के साथ जमीन धंसने से कुछ घर भी जमींदोज हो गए है.  सौभाग्यशाली रहे घरवाले, जो उस समय घर में नहीं थे. जमीन धंसने से लगभग 500 मीटर की गहरी खाई बन गई है.

धसान इतनी तेज थी कि सुरक्षा गार्ड दूर से ही देख कर भागे 

अगल-बगल रहने वाले लोग दहशत में है. सुरक्षित स्थान ढूंढ रहे हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तड़के जोरदार आवाज के साथ जमीन धंसी. इस घटना से परियोजना में लगाए गए बिजली के कई पोल  गिर गए.  हादसे के वक्त निकली चिंगारी के कारण पूरा इलाका रोशन हो गया था. हादसे की गंभीरता को देखते हुए वहां तैनात सुरक्षा गार्ड भाग खड़े हुए. घटना के तुरंत बाद वहां पहुंचे झामुमो नेता अशोक मंडल  ने कहा कि प्रबंधन केवल उत्पादन पर ध्यान देता है, सुरक्षा ताक पर रखकर काम किए जा रहे है.  आपको बता दें कि मंगलवार को थापर नगर में सड़क में दरार पड़ गई थी. इस घटना से भी दहशत का माहौल बन गया था। 11 अगस्त को धनबाद के सिजुआ भद्री चक बस्ती मैं घर के बाहर गोफ  बन गया था. इसी दिन लोदना  के खेल मैदान में जोरदार आवाज के साथ गोफ  बना था. इसके पहले केंदुआडीह इंस्पेक्टर कार्यालय के बाहर भी गोफ  बनने की सूचना आई थी. 

जीवित लोग भी समाते रहे है गोफ में 

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुछ साल पहले झरिया में जीवित व्यक्ति गोफ  में समा गया था.  इसके पहले केंदुआडीह  में खटिया पर सोई महिला धरती में चली गई थी.  हर साल बरसात के मौसम में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं, लोगों की जाने जाती है और भूमिगत आग को बुझाने का ढिंढोरा पीटा जाता है. 1916 से कोयलांचल में जमीन के अंदर आग धधक रही है, आग बुझाने के नाम पर पानी की तरह पैसे बहाए गए लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला और घटनाएं लगातार जारी है. जमीन के अंदर करीब सौ साल से सुलग रहे कोयले के कारण  खोखली हो रही जमीन लगातार धंस रही है.  कुछ साल पहले झरिया में   गैराज  की  जमीन धंस गई, जिसमें बाप-बेटा जिंदा दफन हो गए थे.    85 डिग्री सेल्सियस तापमान होने के कारण  रेस्क्यू टीम गोफ में जाने से इंकार कर दिया था.   इस गोफ में  गैराज मिस्त्री बबलू गद्दी (50) और उनका बेटा रहीम (15) समा गए थे.  

100 साल से भी पुराण है भूमिगत आग का इतिहास 

कोयलांचल में कोयला खनन का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही पुराना इतिहास भूमिगत आग का भी है.  आपको बता दें कि 12 साल में लगभग ग्यारह सौ करोड़  रुपए से अधिक खर्च  के बाद भी झरिया पुनर्वास के नाम पर आंकड़ों के मुताबिक 2676 परिवारों को ही शिफ्ट किया जा सका है. 12 साल की अवधि में झरिया के पुनर्वास में बीसीसीएल ,जेआरडीए विफल रहा है.  बेलगड़िया में 18000 आवास तैयार अथवा निर्माणाधीन है, इनमें अब तक 2676 परिवारों का पुनर्वास हो पाया है.  बाकि  लोग शिफ्टिंग में आनाकानी कर रहे है.  जानकारी के अनुसार 24 अगस्त को झरिया पुनर्वास पर दिल्ली में बड़ी बैठक होने वाली है.

Tags:News

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