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एक शिक्षक से मुख्यमंत्री तक का सफर, जानिए  बाबूलाल मरांडी के बारे में, जो आज मना रहे 66वां जन्मदिन, पढ़िए विशेष 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 11:52:59 AM

टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- झारखंड की सियासत में 11 जनवरी का दिन काफी खास है. इसी दिन राजनीति के दो धुरंधर जेएमएम के शिबू सोरेन और बीजेपी के बाबूलाल मरांडी का जन्म हुआ. इन दोनों आदिवासी नेताओं ने इस प्रदेश की राजनीति को बहुत करीब से देखा, समझा और जाना . 
शिबू सोरेन तो अलग झारखंड राज्य बनाने में जोर शोर से आंदोलन किया. वही बाबूलाल मरांडी ने भी भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी.  एक शिक्षक से लेकर झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया. बाबूलाल का आज 66वां जन्मदिन है . मौजूदा वक्त में वे भाजपा के प्रदेश प्रमुख है, औऱ एक जननेता के तौर पर काफी लोकप्रिए हैं. अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार के खिलाफ उनके मुखर बोल से सत्ता पक्ष भी बेचेन हो उठता है.

गिरिडीह में हुआ था जन्म 

गिरिडीह के कोदइबांध गांव मे 11 जनवरी 1958 को किसान परिवार में बाबूलाल मरांडी का जन्म हुआ था. इनके पिता का नाम छोटे लाल मरांडी और माता का नाम श्रीमति मीना मुर्मू है. उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से भूगोल से एमए किया और  पढ़ाई के दौरन ही आरएसएस से जुड़ गये. 1989 में उनकी शादी शान्ति देवी से हुई, जिससे एक बेटा अनूप मरांडी हुआ . लेकिन, 27 अक्टूबर 2007 को गिरिडीह क्षेत्र में हुए नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई. 

राजनीति में कदम 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से पूरी तरह जुड़ने से पहले मरांडी एक स्कूल में शिक्षक के तौर पर पढ़ाते भी थे. सबसे पहले उन्हें झारखंड प्रदेश के विश्व हिन्दू परिषद का संगठन सचिव बनाया गया. 1983 में दुमका जाकर संथाल परगना डिवीजन में काम भी करने लगे . उन्होंने दुमका से अपना पहला लोकसभा चुनाव 1991 में लड़ा. लेकिन, पराजय मिली, 1996 में फिर जेएमएम के कद्दावर नेता शिबू सोरेन से हार गये. हालांकि, संकल्पशक्ति के धनी बाबूलाल ने कभी हार नहीं मानी.  भाजपा में उनकी गहरी पकड़ के चलते 1998 में झारखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. पार्टी ने उनकी अगुवाई में 14 में से 12 सीट जीतने में कामयाब रही. 1998 के ही लोकसभा चुनाव में बाबूलाल ने शिबू सोरेन को आखिरकार शिकस्त दे ही डाली. 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में  बाबूलाल वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री भी बनें.

झारखंड के पहले मुख्यमत्री 

2000 में झारखंड अलग राज्य बना, तो बाबूलाल मरांडी प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बनने का  गौरव हासिल किया. हालांकि, 2003 में आतंरिक विरोध के चलते सीएम पद छोड़ना पड़ा औऱ बागडोर बीजेपी के ही अर्जुन मुंडा को सौंपनी पड़ी. इसके बाद भी एनडीए से लगातार जुड़े रहें और इसका विस्तार किया. 2004 में कोडरमा लोकसभा सीट पर  शानदार जीत दर्ज की, जबकि एनडीए के बाकी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा.    

भाजपा से अलग होकर जेवीएम का गठन 

2006 में बाबूलाल ने भाजपा से अलग हो गया. ये उनके राजनीतिक करियर का शायद गलत फैसला था. क्योंकि बाद में फिर वो बीजेपी में ही वापसी की. दरअसल, बीजेपी से अलग होने के बाद मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा नाम से अलग राजनीतिक दल बनाया. उनके साथ भाजपा के पांच विधायक भी जुड़ गये. इस दौरान भाजपा के खिलाफ काफी मुखर होकर इसकी आलोचना भी की. 2019 में धनवार विधानसभा से जेवीएम पार्टी से इलेक्शन लड़े और बड़ी जीत हासिल किया. बाद में जेवीएम का विलय कर भाजपा में एकबार फिर शामिल हो गये. मौजूदा वक्त में बाबूलाल मरांडी झारखंड भाजपा के प्रमुख है. 

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