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Grim reality of Dhanbad:- कोलियरी इलाकों की हालत-कोयला चोरी पर पर क्यों नहीं जारी हो रहा श्वेत पत्र, कौन है जिम्मेवार !

BY - Satya Bhushan Singh Dhanbad

Published at: 19 Dec 2025 12:51 PM (IST)

Grim reality of Dhanbad:- कोलियरी इलाकों की हालत-कोयला चोरी पर पर क्यों नहीं जारी हो रहा श्वेत पत्र, कौन है जिम्मेवार !

धनबाद (DHANBAD) : धनबाद के केंदुआडीह में गैस रिसाव के बाद कोयलांचल पर केवल कोल इंडिया की ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक की नजर फिलहाल है. राज्य के मुख्य सचिव भी धनबाद आए, कोयला मंत्रालय ने भी पत्राचार किया, कोल इंडिया के अध्यक्ष भी धनबाद पहुंचे. यह अलग बात है कि गैस प्रभावित इलाके में काम जारी है और गैस रिसाव को रोकने की दिशा में काम आगे बढ़ गया है. लेकिन सवाल उठता है कि धनबाद कोयलांचल के कोलियरी इलाकों के वर्तमान हालत क्या है, इस पर डीजीएमएस अथवा बीसीसीएल या कोल्  इंडिया क्या कोई श्वेत पत्र जारी करेंगे? बीसीसीएल अथवा कोल इंडिया चाहे तो पूरे इलाके की साइंटिफिक जांच  कर श्वेत पत्र जारी कर सकती है.  इससे वर्तमान हालातो का पता चल सकता है. 

निजी कंपनियों को दोषी बता कर क्या बच सकते है अधिकारी ?
 
अभी भी गैस रिसाव अथवा धंसान के लिए निजी कंपनियों के कोयला खनन व्यवस्था को दोषी ठहराया जाता है. लेकिन अब तो कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण हुए भी 50 साल से अधिक हो गए. क्या अभी भी  निजी कंपनियों  के माथे पर ही दोष  देकर कोल इंडिया के अधिकारी खुद को बचाते रहेंगे. धनबाद में ही डीजीएमएस का मुख्यालय है. ऐसे में डीजीएमएस भी चाहे तो सर्वेक्षण करा कर श्वेत पत्र जारी कर सकता है.  कौन से इलाके सबसे अधिक खतरनाक हैं, कहां जमीन के अंदर क्या हलचल है, इसका भी डिटेल्स  जानकारी लोगों को मिल सकती है.  लेकिन फिर सवाल वही है कि क्या श्वेत पत्र जारी करने की दिशा में किसी को कोई इंटरेस्ट है? धनबाद के जन  प्रतिनिधियों को भी चाहिए कि श्वेत पत्र के लिए दबाव बनाया जाए.

बीसीसीएल की बंद खदानों के क्लोज़र रिपोर्ट में की खेल है ?
  
कहा जाता है कि बीसीसीएल की जो परित्यक्त खदानें हैं, उनका क्लोजर रिपोर्ट जारी नहीं किया गया है.  खदान बंदी के जो नियम होते, उसका पालन नहीं किया जाता. यह बात तो सच है कि कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण  के बाद बालू भराई  में जबरदस्त खेल हुआ था.  जिस तरह आज कोयला चोरी कर लोग  फर्श से अर्श  पर पहुंच गए है , इस तरह ही बालू भराई को लेकर भी ठेकेदार माफिया बन गए थे.  जिसका परिणाम आज कोयलांचल भुगत रहा है.  इसके लिए भी कोयला अधिकारियों को दोष मुक्त नहीं किया जा सकता. आखिर अवैध  खनन करने वाले परित्यक्त खदानों का मुहाना कैसे खोल लेते हैं? क्या इसकी कोई जानकारी कोयला अधिकारियों को नहीं मिलती? 

बीसीसीएल के सीएमडी सार्वजनिक मंच से बड़ी बात कह रहे 

इधर, बीसीसीएल के सीएमडी  ने सार्वजनिक मंच से यह कहा कि कोयला चोरी धनबाद के लिए कोढ़ है. मतलब आधिकारिक तौर पर यह  स्वीकार लिया गया है कि धनबाद में कोयला चोरी हो रही है. इससे बड़ा प्रमाण तो कुछ हो भी नहीं सकता. बीसीसीएल को भी चाहिए कि कैसे कोयला चोरी हो रही है, कहां-कहां कोयला चोरी हो रही है.  बीसीसीएल क्या कर रही  है, पुलिस को क्या करना चाहिए, एडमिनिस्ट्रेशन को क्या करना चाहिए. इसका भी एक श्वेत पत्र जारी करें, कौन लोग कहां पर्दें  के पीछे रहकर कोयला चोरी कर रहे है.  उनका भी नाम उजागर होना चाहिए और उसके बाद उस पर अंकुश लगाने की कार्रवाई होनी चाहिए.  कम से कम बीसीसीएल के लीज होल्ड  एरिया में तो सीआईएसएफ की भारी फौज है.  फिर तो लीज  होल्ड एरिया में कैसे कोयला चोरी हो रही है? इसका भी डिटेल्स रिपोर्ट जारी होना चाहिए.  झारखंड के चर्चित विधायक सरयू  राय ने अभी हाल ही में धनबाद में आरोप लगाया था कि खदानों की  क्लोजर रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाता. 

आखिर डीजीएमएस क्यों नहीं बताता कि कितनी खदानें बंद की गई हैं ?

डीजीएमएस यह  नहीं बताता कि  कितनी खदानें बंद की गई है और उनकी सुरक्षा के क्या उपाय किए गए हैं? ऐसे में यह  जरूरी हो गया है कि कम से कम बीसीसीएल अपने लीज होल्ड एरिया के संबंध में श्वेत पत्र जारी करें, जिससे कम से कम रांची से लेकर दिल्ली तक के अधिकारियों को यह पता चले कि कोयलांचल का भविष्य क्या है और उसके भविष्य के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है? वर्तमान में कोयलांचल की जो स्थिति है, वह डरावनी कही जाएगी. क्योंकि कहीं गैस रिसाव  हो रहा है, कहीं धंसान  हो रहा है. लोगों के घर जमींदोज  हो जा रहे हैं, आगे ऐसी घटनाएं नहीं हो, इसके लिए जितना  जरूरी पुनर्वास है ,उतना ही जरूरी कोयलांचल की  वास्तविक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना है.  

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadJharkhandKoyalanchalHalaatCoal

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