बोकारो (BOKARO): नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) दके तरफ से मॉनसून अवधि में बालू उत्खनन पर लगी रोक की मियाद 15 अक्टूबर को पूरी हो गयी है. इसके बावजूद नदी घाटों से बालू का उठाव नहीं हो रहा है. 10 जून से 15 अक्टूबर तक तीन माह बारिश के दौरान नदियों में बालू और मिट्टी कटाव को रोकने और नदियों में जलजीवों के आने के कारण बालू उत्खनन पर रोक लगा दी गयी थी. अब 16 अक्टूबर से बालू खनन का रास्ता साफ हो गया है. परंतु बोकारो जिले के बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं होने के कारण नदियों से बालू का उत्खनन नहीं हो सकेगा, जिससे विकास की गति आगे भी थमी हुई रहेगी. बालू घाटों की बंदोबस्ती के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है. इधर बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं होने से निर्माण कार्य पर प्रतिकुल असर पड़ेगा. वहीं एनजीटी की अवधि पूरी होने के बाद चोरी-छिपे होने वाली बालू उत्खनन पर अंकुश लगाना आगे भी चुनौती साबित होगी. चुंकि एनजीटी की मियाद पूरी होने के बाद निजी और सरकारी निर्माण कार्य में गति पकड़ने की उम्मीद है.
गोमिया विधायक ने सरकार पर फोड़ा ठीकरा
इस संबंध में गोमिया विधायक डॉ लम्बोदर महतो ने राज्य सरकार पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि राज्य की निकम्मी सरकार को 32 महीने पूरे हो गए हैं. एनजीटी की बालू उत्खनन पर लगी रोक की मियाद 15 अक्टूबर को ही पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद भी सरकार नदी घाटों को बंदोबस्त कराने के प्रति संवेदनशील नहीं है. राज्य के निकम्मी सरकार की वजह से पूरे राज्य में विकास की गति रूकी हुई है. उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि सरकार जल्द ही पूरे राज्य में बालू घाटों की बंदोबस्ती कराए, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व मिलने के साथ साथ राज्य में विकास की गति भी आगे बढ़ सकें.
उत्खनन की रोकथाम के लिए कार्रवाई जारी
वही इस संबंध में गोमिया सीओ संदीप अनुराग टोपनो ने कहा कि एनजीटी की मॉनसून अवधि पर लगी रोक की मियाद 15 अक्टूबर को पूरी हो गई है. लेकिन बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं हुई है. इस कारण बालू का अवैध रूप से उत्खनन की रोकथाम के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
रिपोर्ट: संजय कुमार, बोकारो