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धनबाद की लड़कियां बोलीं -शक्ति ऍप किसी काम का नहीं , 2010 में गुजरा था शहर दुमका के  दौर से -जानिए पूरा मामला 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 7:38:30 AM

धनबाद (DHANBAD: दुमका की अंकिता की मौत के बाद धनबाद में पढ़ने वाली लड़कियां कह रही हैं कि कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. सरकार की किसी भी योजनाओं को दिखावा बताते हुए उनका कहना है कि सरकार, जो भी काम शुरू करती है, उसे सही ढंग से आगे नहीं बढ़ाया जाता. नतीजा है कि महिलाओं में डर हमेशा बना रहता है. दुमका की अंकिता की मौत का मामला इसी का एक उदाहरण है.  रघुवर सरकार में जारी किये गये शक्ति एप के बारे में उनका कहना है कि एक तो इसका सही से प्रचार-प्रसार नहीं हुआ. सभी लड़कियां इसे जानती नहीं हैं, गांव-देहात वालों को तो कुछ भी मालूम नहीं है और ऐसी भी बहुत सारी लड़कियां हैं, जिनके पास अभी भी मोबाइल नहीं है. 

ऐसे में में शक्ति ऍप के क्या फायदे , लड़कीयो ने क्या कहा  
 
ऐसे में इस ऍप  का क्या फ़ायदा.  छात्रा उषा कुमारी कहती है कि लड़कियां पूरी तरह असुरक्षित हैं.  इसके लिए सरकार को कड़ा कानून बनाना चाहिए.  वहीं छात्रा मुस्कान सिंह कहती है कि सरकार को इस पर क्लियर कट स्टैंड लेना चाहिए और सख्त नियम बनाना चाहिए, क्योंकि सरकार की योजनाएं दब जाती हैं और फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है.  छात्रा कल्याणी सिंह ने कहा कि कितनी आश्चर्य की बात है कि पुलिस के पकड़ में भी आरोपी हंस रहा है, वह समझ रहा है कि उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा.  उसके परिवार वाले उसे बचा लेंगे.  वही छात्रा पूजा चक्रवर्ती कहती हैं कि लड़कियां कहीं भी सेफ  नहीं है ,पढ़ाई में लड़कियों की सुरक्षा के लिए अलग से एक विषय जुड़ना चाहिए ,जिसकी ट्रेनिंग स्कूल लेवल पर ही लड़कियों को मिलती रहे.  

दुमका की तरह धनबाद  में भी  2010 में हुई थी घटना 

आपको बता दें कि दुमका की अंकिता की तरह ही 2010 में धनबाद में भी एक घटना घटी थी.  जिसमें लड़की के जीजा ने ही पेट्रोल छिड़ककर तीन बहनों को आग के हवाले कर दिया था.  और बिस्तर पर पड़ी-पड़ी तीनों जल कर मर गई.  उन्हें चीखने- चिल्लाने तक का मौका नहीं मिला था.  लड़कियों के पिता शंकर प्रसाद से आज The Newspost  की टीम ने मुलाकात की.  उन्होंने कहा कि घटना का विवरण शब्दों में नहीं किया जा सकता.  उन्हीं का दामाद जबरदस्ती उनकी छोटी बेटी से शादी करने के लिए दबाव दिया.  ऐसे में एक लड़की तो उसके पास मेरी थी, हम शादी कैसे कर देते.  फिर उसने चंडीगढ़ से धनबाद आकर पेट्रोल छिड़ककर घर में एक साथ सोई तीन बहनों को आग के हवाले कर दिया और तीनों जल मरीं.  शादीशुदा बेटियों के बच्चों को वह अभी भी पाल रहे हैं और उन्हें पढ़ा रहे हैं.  उस समय के वार्ड पार्षद रहे अशोक पाल ने कहा कि घटना बहुत दुखदाई थी. पुलिस  एक्शन में आई और जलाने वाले को पकड़ लिया गया.  उसे अब आजीवन कारावास की सजा हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं बहुत पीड़ा देती हैं. अंकिता को जलाने वाले को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. 

 
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश 

Tags:News

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