qधनबाद(DHANBAD) | झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह 23 फरवरी की परीक्षा में तो पूरे के पूरे 100 अंक लाकर सबको चौंका दिया है. जो लोग यह सोच रहे थे कि संजीव सिंह को मेयर चुनाव में परास्त कर देंगे, उनकी सारी योजना धराशाई हो गई और संजीव सिंह भारी बहुमत से मेयर का चुनाव जीत गए. लेकिन इसके साथ ही संजीव सिंह को एक और परीक्षा देनी होगी। 23 फरवरी की परीक्षा में तो वह उत्तीर्ण हो गए हैं, लेकिन 18 मार्च की परीक्षा उनकी "राजनीति कौशल" की अग्नि परीक्षा होगी। होली के बहाने डिप्टी मेयर के लिए लॉबिंग तेज है.
पकाई जा रही तरह -तरह की खिचड़ी -----
इस मामले में धनबाद की राजनीति से जुड़े सभी लोग इंटरेस्ट ले रहे हैं. दावेदारों ने अपने पक्ष में समीकरण बनाने की कोशिश शुरू कर दिए हैं. होली के बहाने खिचड़ी पकाई जा रही है. यह बात तो सच है कि धनबाद की राजनीति का एक तबका संजीव सिंह की जीत को पचा नहीं पा रहा है और वह डिप्टी मेयर में खेल करने की कोशिश में लगा हुआ है. देखना दिलचस्प होगा कि 18 मार्च की परीक्षा में संजीव सिंह अपनी किस "राजनीतिक कौशल" का परिचय देते हैं. बता दें कि 18 मार्च को ही डिप्टी मेयर का चयन होगा। चुने हुए पार्षदों में से कोई एक डिप्टी मेयर बनेगा।
बदलती दिख रही है कोयलांचल की राजनीति ----
यह बात भी सच है कि मेयर चुनाव जीतने के बाद एक बार फिर धनबाद की राजनीति "सिंह मेंशन" में सिमट गई है. डिप्टी मेयर बनने के लिए "दरबार" लगने लगे हैं. डिप्टी मेयर का पद भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता है. इस वजह से कम से कम निगम चुनाव में मेयर में अपने सपोर्टेड प्रत्याशी को नहीं जीता पाने के दुख को डिप्टी मेयर बनाकर कुछ हद तक दूर करना चाह रहे हैं. मतलब साफ है कि जिस तरह मेयर चुनाव की लड़ाई हुई, उससे कम दिलचस्प लड़ाई डिप्टी मेयर के लिए भी नहीं होने जा रही है. निश्चित रूप से संजीव सिंह चाहेंगे कि उनका समर्थक ही कोई डिप्टी मेयर बने, जबकि उनका विरोध करने वाले इस कोशिश में है कि डिप्टी मेयर बनाकर वह अपनी लाज को बचा लें.
संजीव सिंह के समर्थक कई पार्षद भी लगाए हैं जोर ---
हालांकि संजीव सिंह के समर्थक कई पार्षद भी इस रेस में हैं. रात दिन इसके लिए लॉबिंग चल रही है. अब धनबाद की नजर डिप्टी मेयर की कुर्सी पर टिक गई है. रणनीतिकारों की मदद ली जा रही है. बैठकों का दौरा शुरू हो गया है. सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि "शक्ति संतुलन" को बनाए रखने के लिए डिप्टी मेयर की कुर्सी का उपयोग किए जाने की तैयारी चल रही है. हालांकि इसमें किसको कितनी सफलता मिलेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, सूत्र दावा कर रहे हैं कि संजीव सिंह को चुनौती देने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है. इस रणनीति में कम से कम वैसे लोग तो पूरी तरह से शामिल है, जो चुनाव में संजीव सिंह का विरोध कर रहे थे. क्योंकि भाजपा के तीन विधायक और एक सांसद के रहते भाजपा समर्थित उम्मीदवार चौथे नंबर पर चला गया है. यह बात कम से कम विधायक और सांसद को नहीं पच रहा है.
सबकी नजर टिक गई है "सत्ता संतुलन" के खेल में ---
ऐसे में शक्ति संतुलन के लिए डिप्टी मेयर की कुर्सी को हथियार बनाने की तैयारी अंदरखाने जोर-शोर से चल रही है. सूत्रों के अनुसार डिप्टी मेयर के लिए कम से कम 30 पार्षदों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है. समर्थन जुटाने के लिए कई संभावनाओं को तलाशा जा रहा है. बता दें कि नगर निगम के 55 वार्डो से चुने गए पार्षदों के बीच से ही डिप्टी मेयर का चयन होना है. किसी भी प्रत्याशी को जीत के लिए कम से कम 28 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है. डिप्टी मेयर के लिए यही अहम् आंकड़ा है. हालांकि 30 या उससे अधिक पार्षदों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है, जिससे कि किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हो.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
