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फिर से बढ़ सकती है राजभवन और सरकार के बीच तकरार, राज्यपाल की आपत्ति को सरकार ने किया दरकिनार

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 1:54:55 AM

रांची(RANCHI): झारखंड में राज्यपाल और सरकार के बीच लगातार तनातनी की खबरें आती रहती है. चाहे वो सीएम हेमंत से जुड़े खनन लीज मामले में चुनाव आयोग के फैसले को लेकर हो, TAC को लेकर हो या फिर उत्पाद विधेयक को लेकर हो, राज्यपाल और राज्य सरकार लगातार एक दूसरे से भीड़ जा रहे हैं. नया मामला भी उत्पाद विधेयक को लेकर ही है.

बिना संशोधन के फिर से विधानसभा में पेश किया जाएगा झारखंड उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2022

राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2022 को आपत्तियों के साथ वापस भेज दिया था. मगर, राज्यपाल के आपत्तियों के बावजूद झारखंड सरकार फिर से झारखंड उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2022 को विधानसभा में पेश करेगी, वो भी बिना किसी संशोधन के. ऐसे में फिर से एक बार राजभवन और सरकार के बीच इस लड़ाई को हवा मिल गई है.   

बता दें कि राज्यपाल की आपत्तियों पर उत्पाद विभाग ने सरकार को जवाब दिया. इस जवाब से संतुष्ट होकर बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर सहमति दी गई. जिसके बाद ये फैसला लिया गया कि विधानसभा के अगले सत्र में इस विधेयक को फिर से पेश किया जाएगा.  

क्या है झारखंड उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2022?

बता दें कि मई 2022 से झारखंड में शराब की खुदरा बिक्री झारखंड राज्य बिवरेज कॉरपोरेशन लि के माध्यम से की जा रही है. इस शराब बिक्री के लिए उत्पाद विभाग ने नियम और नीति निर्धारित की. जिसके बाद नई व्यवस्था के तहत व्यापार शुरू किया गया. उत्पाद विभाग के इस नई नीति के अनुरूप कानून में बदलाव भी जरूरी था. इसके लिए विधानसभा में झारखंड उत्पाद संशोधन विधेयक 2022 पेश की गई, जिसे पारित भी कर दिया गए. इस विधेयक के अनुसार राज्य सरकार के नियंत्रण वाले निगम द्वारा संचालित लाइसेंस के नियमों में निगम की ओर से अधिकृत एजेंसी और कर्मचारियों को असंवैधानिक कृतियों के लिए उत्तरदाई माना गया है. वर्तमान में राज्य सरकार के लिए निर्धारित शराब की बिक्री बिवरेज कॉरपोरेशन के माध्यम की जाती है. बिवरेज कॉरपोरेशन द्वारा चयनित एजेंसियां दुकानों का संचालन करती हैं. इस प्रावधान में उल्लेख है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी पाए जाने पर एजेंसी के कर्मचारियों को ही उस बिक्री का जवाबदेह माना जाएगा.

इसी विधेयक को विधानसभा में पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया था, जिसे राज्यपाल ने आठ आपत्तियों के साथ वापस सरकार को भेज दिया था. मगर, सरकार का मानना है कि विधेयक पर किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है.

राज्यपाल कितनी बार कर सकते हैं एक विधेयक को वापस

राज्यपाल और सरकार के बीच इस तनातनी में ये सवाल उठने लगा है कि राज्य सरकार के फिर से विधेयक पारित कराने के बाद क्या राज्यपाल फिर से विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस लौटा सकते हैं. तो जवाब है कि नहीं.

दरअसल, अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यों की विधायिका द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है. राज्यपाल इस पर अपनी सम्मति दे सकते हैं या इसे अस्वीकृत कर सकते हैं. वह इस विधेयक को संदेश के साथ या बिना संदेश के पुनर्विचार के लिए सरकार को वापस भेज सकते हैं. मगर, एक बार पुनर्विचार के बाद दोबारा विधेयक आ जाने पर वह इसे अस्वीकृत नहीं कर सकते. उन्हें ये विधेयक मान्य करना होगा. ऐसी परिस्थित जिसमें राज्यपाल को इस विधेयक को मान्य नहीं करना चाहते तो वह इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भी भेज सकते हैं.

फिर से राजभवन और सरकार आमने-सामने

बता दें कि इससे पहले भी राजभवन और सरकार एक दूसरे के सामने आते रहे हैं. चाहे वो हेमंत सोरेन से जुड़े खनन लीज मामले में चुनाव आयोग के फैसले की बात हो, TAC की नियुक्ति हो या उत्पाद विधेयक को वापस लौटाना हो हमेशा ही राजभवन और सरकार के बीच तकरार देखने को मिली है. TAC की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास था, जिसे झारखंड सरकार ने नियमावली में संशोधित करते हुए मुख्यमंत्री को दिया था. वही दूसरी ओर खनन लीज मामले में चुनाव आयोग के फैसले को राज्यपाल ने अब तक सार्वजनिक नहीं किया है. इसके लिए लगातार राजभवन पर सरकार हमलावर रही है. इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा विधानसभा से पारित झारखंड उत्पाद विधेयक -2022 को राज्यपाल ने वापस लौटा दिया था और उस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था. अब राज्यपाल की आपत्ति के बावजूद इस विधेयक को बिना किसी संशोधन के विधानसभा के पटल पर रखने के राज्यसरकार के इस फैसले से फिर से दोनों के बीच तनातनी और तकरार बढ़ने की आशंका है.   

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