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जानिए एक शिक्षक की व्यथा, दो वर्षों से नहीं हुआ मानदेय का भुगतान, रिटायरमेंट के बाद कैसे होगा गुज़ारा

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:26:17 AM

बोकारो (BOKARO): जिले के तुलबुल पंचायत स्थित अंबेडकर स्मारक उच्च विद्यालय की स्थिति इन दिनों काफी दयनीय हो गई है. विद्यालय में छात्रों की संख्या काफी कम हो चुकी है. शिक्षकों में भी उदासी छाई हुई है. वरीयता के आधार पर शिक्षकों का मासिक मानदेय अधिकतम ₹1340/- और न्यूनतम ₹444/- प्रति माह मिलता है. लेकिन विद्यालय प्रबंध समिति का गठन नहीं होने से शिक्षकों का यह भी मासिक मानदेय पिछले दो वर्षों से रुका हुआ है. जिसके कारण शिक्षक अवसाद और तनावग्रस्त जिंदगी जीने पर मजबूर है. इस संबंध में विद्यालय के शिक्षक मो0 कलाम अंसारी कहते हैं कि आगामी अक्टूबर माह में उनकी रिटायरमेंट है,और रिटायरमेंट के बाद उन्हें कुछ हो जाता है तो पैसे के अभाव में उन्हें कफ़न भी नसीब नही होगा.

बच्चों को नहीं मिल रहा पढ़ाई का महौल

वहीं विद्यार्थियों की माने तो उन्हें इस विद्यालय में पढाई करने का मन नहीं करता है. कारण जो भी हो, यहां विद्यार्थियों को पढ़ाई का माहौल नहीं मिल पा रहा है. कुछ विषयों के शिक्षक भी नही हैं, और जो हैं वें भी अनमने मन से पढ़ाई करवाते हैं. विद्यालय भवन भी कई जगहों से जर्जर हो गया है. बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने लगता है. छात्रवृत्ति की राशि भी विद्यार्थियों को नहीं मिलती है. वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों का नामांकन इस विद्यालय में करवाने से कतराते हैं. द्यार्थियों की घटती संख्या,अवसादग्रस्त शिक्षक और सरकारी उदासीनता के कारण यह विद्यालय भविष्य के अंधकार में खोता जा रहा है.

आदिवासियों के बीच शिक्षा का अलख जगाने के लिए खोला गया स्कूल

बता दें कि आदिवासी बहुल क्षेत्र तुलबुल में शिक्षा का अलख जगाने के लिए कुछ ग्रामीणों ने वर्ष 1983 में अंबेडकर स्मारक उच्च विद्यालय का स्थापना किया था. विद्यालय के खुलने से तुलबुल सहित आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी. वर्ष 2016 में इस विद्यालय को सरकार के तरफ से स्थापना प्रस्वीकृति भी प्राप्त हो गया था. स्थापना प्रस्वीकृति मिलते ही विद्यालय को सरकारी अनुदान की राशि भी मिलना शुरू हो गया. कुछ दिनों के बाद विद्यालय प्रबंध समिति और शिक्षकों के बीच आपसी तालमेल का अभाव हो गया. फिर कुछ ऐसा हुआ कि विद्यालय के कुछ शिक्षकों पर छात्रवृत्ति की राशि गबन करने का आरोप लग गया, जिसका मामला न्यायालय में चल रहा है.

विद्यालय प्रबंध समिति हुआ भंग

इधर पिछले कई वर्ष पूर्व ही कार्याकाल पूरा हो जाने से विद्यालय प्रबंध समिति भंग हो गया है. वहीं एक दूसरे पर दोषारोपण करने के कारण नए सिरे से समिति गठन करने में दांवपेंच का खेल होना शुरू हो गया. समिति का गठन नहीं होने से सरकार के द्वारा दी गई अनुदान राशि पिछले दो-ढाई वर्षो से शिक्षकों के बीच वितरण भी नहीं हो पा रही है. इस कारण शिक्षक भी उदासीन है.कुल मिलाकर देखा जाए तो तुलबुल स्थित अंबेडकर स्मारक उच्च विद्यालय भविष्य के अंधकार में खोता जा रहा है. अब देखना है कि सरकार इस विद्यालय के प्रति अपना रुचि कितना दिखाती है.

रिपोर्ट: संजय कुमार, बोकारो/गोमिया 

Tags:News

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