धनबाद(DHANBAD): धनबाद में शहर की सरकार बन गई है. लेकिन इसकी चर्चाएं अभी थमी नहीं हैं. इस चुनाव ने धनबाद से लेकर रांची तक और रांची से लेकर दिल्ली तक एक अलग छाप छोड़ा है. इस बीच यह भी कहा जा रहा है कि 2026 में ,जो नगर की सरकार बनी है, इसमें पहली बार ऐसा मौका आया है ,जब रघुकुल के हाथ से डिप्टी मेयर की कुर्सी निकल गई है. यह अलग बात है कि निगम चुनाव में रघुकुल कहीं था भी नहीं, रघुकुल के कोई लोग चुनाव नहीं लड़ रहे थे. फिर भी पिछले दो नगर की सरकारों का अवलोकन किया जाए, तो दोनों बार डिप्टी मेयर की कुर्सी रघुकुल के पास थी.
2006 में धनबाद नगर निगम का गठन हुआ था ,फिर ....
दरअसल, 2006 में धनबाद नगर निगम का गठन हुआ था. इसके पहले यहां नगरपालिका थी. पहला चुनाव 2010 में हुआ तो श्रीमती इंदु देवी पहली मेयर चुनी गई. उस समय डिप्टी मेयर का चुनाव भी जनता के वोट से हुआ था. कांग्रेस नेता स्वर्गीय नीरज सिंह उस समय डिप्टी मेयर का चुनाव जीते थे. उसके बाद 2016 में निगम का चुनाव हुआ. इस बार डिप्टी मेयर का चुनाव निर्वाचित पार्षदों में किया था. शेखर अग्रवाल मेयर चुने गए तो नीरज सिंह के भाई एकलव्य सिंह डिप्टी मेयर बने थे. एकलव्य सिंह को निर्वाचित पार्षदों ने डिप्टी मेयर चुना था. उसके बाद 2026 में निगम का चुनाव हु. इस चुनाव में पूर्व विधायक संजीव सिंह मेयर चुने गए, तो पार्षदों ने डिप्टी मेयर के लिए अरुण चौहान को अपना मत दिया.
अरुण चौहान को 55 में से 50 वोट मिले ,उनकी शानदार जीत हुई
अरुण चौहान को 55 में से 50 वोट मिले और वह डिप्टी मेयर बन गए. यह अलग बात है कि डिप्टी मेयर के चुनाव में भी अंदरखाने कई तरह की राजनीति हुई, लेकिन अंतत अरुण चौहान विजई रहे और अब वह डिप्टी मेयर बन गए हैं. यह अलग बात है कि निगम के चुनाव परिणाम ने कोयलांचल की राजनीति के लिए कुछ अलग संदेश दे दिया है. देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीति आगे चलकर किस मोड़ पर खड़ी होती है? क्योंकि भाजपा से बागी बनकरसंजीव सिंह चुनाव मैदान में उतरे थे और भारी मतों से वह चुनाव जीत गए. भाजपा समर्थित उम्मीदवार चौथे नंबर पर चले गए , जबकि झामुमो समर्थित उम्मीदवार शेखर अग्रवाल दूसरे नंबर पर रहे. तो कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार शमशेर आलम तीसरे नंबर तक पहुंच पाए.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो