रांची(RANCHI): राजधानी में ब्राउन शुगर तस्करी का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है और अब इसमें कई नए नाम सामने आ रहे हैं. पुलिस कार्रवाई के बाद जहां एक बड़ा चेहरा रूबी देवी उर्फ “भाभी जी” को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, वहीं उसके बाद इस पूरे अवैध धंधे की कमान उसके ही रिश्तेदार बताए जा रहे “मौसा जी” उर्फ बबन साह ने संभाल ली है.
बबन साह के जरिए अब रांची के कई स्थानीय तस्कर ब्राउन शुगर की सप्लाई ले रहे हैं और इसे शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचा रहे हैं. इस नेटवर्क में भाभी जी के अन्य रिश्तेदार पिंटू साह और सूरज साह के नाम भी सामने आ रहे हैं, जो इस अवैध कारोबार को आगे बढ़ाने में शामिल बताए जाते हैं.
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि रांची में ब्राउन शुगर की सप्लाई के लिए “पाउडर” जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है. ग्राहक और सप्लायर के बीच इसी शब्द के जरिए सौदे तय होते हैं, ताकि किसी को शक न हो. राजधानी में सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गंगा नगर, विद्यानगर, किशोरगंज और मधुकम जैसे इलाके इस नशे के कारोबार के प्रमुख केंद्र माने जा रहे हैं. यहां के कई पैडलर सासाराम से ब्राउन शुगर लाकर रांची में सप्लाई करने का काम कर रहे हैं.
इससे पहले रांची पुलिस ने लंबे समय तक सक्रिय रहे ब्राउन शुगर नेटवर्क की मुख्य कड़ी भाभी जी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद यह नेटवर्क कुछ समय के लिए कमजोर पड़ा था. लेकिन धीरे-धीरे यह फिर से सक्रिय हो गया.
इसी बीच कभी इस अवैध धंधे का बड़ा नाम रहे कन्हैया की भी चर्चा रही है, जिसे पुलिस ने पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा था. गिरफ्तारी के बाद उसने सार्वजनिक रूप से इस कारोबार से दूरी बनाने की बात कही थी और अन्य लोगों को भी इससे दूर रहने की सलाह दी थी. उसका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले एक वर्ष में रांची में ब्राउन शुगर तस्करी से जुड़े 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. इसके बावजूद इस नेटवर्क के कई मुख्य आरोपी जैसे पवन यादव, मोनू यादव, गांधी और प्रदीप सिंह अब जमानत पर बाहर आ चुके हैं. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस अवैध कमाई को छिपाने के लिए कई आरोपियों ने जमीन में निवेश किया है. खास बात यह है कि संपत्तियां अपने नाम पर नहीं बल्कि रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई हैं, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके.
इसके अलावा कुछ आरोपियों ने पशुपालन और डेयरी व्यवसाय भी शुरू कर दिया है. गाय और भैंस खरीदकर दूध, दही, पनीर और घी का कारोबार बढ़ाया गया है. वहीं कुछ लोगों ने महंगी गाड़ियां भी खरीदी हैं, लेकिन उन्हें भी दूसरों के नाम पर रजिस्टर कराया गया है. फिलहाल रांची पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि इस तस्करी का असली संचालन केंद्र कहां से चल रहा है.