धनबाद (DHANBAD) : भारतीय जनता पार्टी में अब एक "नई भाजपा", नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. 1980 में भारतीय जनता पार्टी बनी थी. चार दशक से भी अधिक समय तक पार्टी में पहली बार सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने है. अटल बिहारी वाजपेई से लेकर लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता भी पार्टी की बागडोर संभाल चुके हैं. बीजेपी के राजनीतिक इतिहास में सबसे पहले पार्टी की कमान अटल बिहारी वाजपेई ने संभाली थी और अब संगठन की बागडोर नितिन नवीन के हाथों में है.आइये आपको बताते हैं कि कौन-कौन कद्दावर नेता भाजपा अध्यक्ष की कमान संभाल चुके हैं. अटल बिहारी वाजपेई के बाद लाल कृष्ण आडवाणी अध्यक्ष बने थे. जानकारी के अनुसार लालकृष्ण आडवाणी तीन बार अध्यक्ष रहे. 77 वर्ष की उम्र में उन्होंने अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ी, उसके बाद मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, जना कृष्णमूर्ति , बैंकया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह, और जेपी नड्डा पार्टी की बागडोर संभाल चुके हैं. नितिन नवीन सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने हैं. लोकसभा चुनाव के बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो गया था. जेपी नड्डा के विकल्प के रूप में नितिन नवीन को चुना गया है.
दिसंबर में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बने थे नितिन नवीन
भाजपा ने नितिन नवीन को दिसंबर में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर सबको चौंका दिया था और अब तो वह परमानेंट अध्यक्ष बन गए है. नितिन नवीन जैसे युवा को संगठन के शीर्ष पद पर पहुंचने का मतलब लगाया जा रहा है कि बीजेपी अब पूरी तरह से दूसरे जेनरेशन लीडरशिप पर काम कर रही है. बीजेपी अब 202 9 को देख रही है. आरएसएस का भी कहना है कि बीजेपी को भविष्य की लीडरशिप पर ध्यान देना चाहिए। बीजेपी के इस निर्णय से साफ हो गया है कि अब पार्टी युवा चेहरों पर फोकस कर रही है. नितिन नवीन को शीर्ष पद देने के पीछे संगठन को आगे के लिए तैयार करना मुख्य मकसद हो सकता हैं. बिहार से कोई नेता पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान संभाल रहा है. नितिन नवीन का पॉलीटिकल करियर लगभग 20 वर्षों का रहा हैं.
पिता की राजनीतिक विरासत को बहुत तेजी से बढ़ाया आगे, परिणाम सामने
लोग बताते हैं कि भले ही उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को कम उम्र में ही संभाल लिया, लेकिन आगे उन्होंने खुद की मेहनत और चतुराई से रास्ता तैयार किया है. उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा पटना पश्चिम से भाजपा के विधायक रहे थे. विधायक रहते उनका निधन 2005 में हो गया था. तब नितिन नवीन की उम्र सिर्फ 25 साल थी. वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. 2006 में अपने पिता के निधन की से खाली हुई सीट पर उपचुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरे और सफल रहे. दो दशक के राजनीतिक कैरियर में उन्होंने विधायक, मंत्री और संगठन के विभिन्न दायित्वों को पूरा करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर तय किया. हर विधानसभा चुनाव में वह भारी अंतर से जीते. संगठनकर्ता और विनम्र स्वभाव से उनकी पहचान बनी और आज पार्टी के शीर्ष पद तक पहुंचे.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
