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बोकारो की लड़ाई अभी बाकी :विस्थापितों का सबसे बड़ा हितैषी कौन साबित करने की कैसे छिड़ी है जंग, पढ़िए इस  रिपोर्ट में

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 8:39:40 AM

धनबाद(DHANBAD) | झारखंड के बोकारो में विस्थापित आंदोलन की आंधी आकर चली गई है.  लेकिन इस बात की लड़ाई नेताओं में छिड़ी  है कि विस्थापितों का सबसे बड़ा हितैषी कौन है? डुमरी के विधायक जयराम महतो और बोकारो की विधायक श्वेता सिंह के बीच छिड़ी जुबानी और एफआईआर  की जंग में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी भी कूद गए है.  बाबूलाल मरांडी भी सोशल मीडिया एक्स  पर पोस्ट कर कहा है कि विस्थापितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले प्रेम महतो  की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी.  प्रेम महतो को शहीद का दर्जा दिलाने और दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराकर सख्त सजा दिलाने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे.  जिससे  पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके.  सूचना के मुताबिक बाबूलाल मरांडी गुरुवार को पीड़ित परिवार से मिले भी.  उन्हें सांत्वना दी,भरोसा दिया.   3 अप्रैल को विस्थापितों के आंदोलन में लाठीचार्ज की वजह से प्रेम महतो  की मौत हो गई थी.  उसके बाद तो एफआईआर  का सिलसिला शुरू हुआ.  मैनेजमेंट ने भी एफआईआर  की तो पुलिस ने भी अपनी ओर से प्राथमिक दर्ज की.   

एफआईआर के बाद चर्चा और तेज हुई 

चर्चा उस समय तेज हो गई, जब डुमरी के विधायक जयराम महतो ने सिटी थाने में बोकारो की कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह सहित अन्य पर नामजद  प्राथमिकी  करा दी.  इस प्राथमिकी  के बाद श्वेता सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी.  उन्होंने कहा कि इस तरह की  विधायक जयराम महतो से उम्मीद नहीं थी फिर भी अगर उन्होंने प्राथमिकी  दर्ज करा ही  दी है, तो देखा जाएगा आगे होता है क्या? एक विस्थापित युवक प्रेम महतो की मौत के बाद एक नए तरह की लड़ाई छिड़ गई है.  झारखंड के दो विधायक आमने-सामने हो गए हैं, तो बोकारो स्टील प्लांट भी चौकस और चौकन्ना है. सूचना के मुताबिक केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने अपनी बोकारो इकाई के कुल 23 अधिकारियों को बदल दिया है.  सीआईएसएफ मुख्यालय ने सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए कार्य स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया है. दूसरी इकाई के अधिकारियों को बोकारो भेजा गया है.

बोकारो  और डुमरी के विधायक हो गए है आमने -सामने 
  
बोकारो विवाद के बाद डुमरी विधायक जयराम महतो और कांग्रेस की विधायक श्वेता सिंह आमने-सामने हो गए है. डुमरी विधायक जयराम महतो ने श्वेता सिंह सहित अन्य के खिलाफ सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है.  इस मुकदमे में उन्होंने कहा है कि दिनांक 3 अप्रैल को झारखंड विधानसभा की पुस्तकालय समिति व खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले की समिति की बैठक में भाग लेने के लिए वह रांची गए थे. रांची में ही सूचना मिली कि बोकारो में प्रदर्शन कर रहे विस्थापित युवकों पर सीआईएसएफ ने लाठीचार्ज कर दिया है. जिसमें कई विस्थापित युवा घायल है और एक प्रेम प्रसाद की मौत हो गई है. सूचना मिलने के बाद बोकारो पंहुचा. बोकारो पहुंचकर मृतक के परिजनों से बीजीएच में मिला. उसके बाद एडीएम बिल्डिंग के समीप सड़क पर धरने पर बैठे विस्थापित लोगों से मिलने लगभग शाम 6:45 बजे गया.  

एफआईआर में हमला करने का लगाया गया है आरोप 

वहां बोकारो विधायक अपने समर्थकों के साथ पहले से मौजूद थी. मेरे पहुंचते ही बोकारो विधायक श्वेता सिंह तथा उनके समर्थकों ने यह  बोलते हुए हमला कर दिया कि मैं बोकारो का विधायक नहीं हूं, हमला करते हुए वह बोल रहे थे कि यहां से निकले, नहीं तो जान से मार देंगे. मेरी गाड़ी पर भी हमला किया गया तथा  विधायक डुमरी लिखा हुआ नेम प्लेट भी तोड़ दिया गया. एक जनप्रतिनिधि का यह आचरण निंदनीय है.   प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि मैं विधायक बाद में हूं, पहले पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष हूं, मैं चाहता तो घटनास्थल पर इसका जवाब दे सकता था. झारखंड में किसी की ताकत नहीं है कि मुझे कहीं जाने से रोक सके. लेकिन मैं स्वयं मामले को बढ़ने नहीं दिया. आवेदन मेंअनुरोध किया गया है कि मेरी शिकायत पर एफआईआर दर्ज करते हुए दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए. बता दे कि बोकारो में लड़ाई अभी बाकी है. आगे-आगे होता है क्या, इस पर सबकी निगाह टिकी है.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:DhanbadBokaroWiwadNetaWisthapit

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