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25 अक्टूबर की वह काली रात ,जिसे याद कर आज भी सिहर जाती है झरिया,जानिए क्यों

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:35:34 PM

धनबाद(DHANBAD) : 25 अक्टूबर '1992 की काली रात को याद कर धनबाद के लोग आज भी सिहर जाते है. झरिया में  एक चिंगारी ने अधिकृत रूप से 29 लोगों की जान ले ली थी, जबकि चर्चा के मुताबिक 60 से अधिक लोग आग में झुलस कर मर गए थे. उस समय धनबाद के उपायुक्त व्यास जी थे जबकि पुलिस अधीक्षक अनिल सिन्हा हुआ करते थे. झरिया की सिंदूरी पट्टी से निकली एक चिंगारी ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया और कीड़े-मकोड़े की तरह झुलस कर लोग मरने लगे. घटना से पहले उस तंग गली में लोग दिवाली की खरीदारी में व्यस्त थे और इसी दौरान एक चिंगारी भड़की और पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया.

देखते-देखते इलाके में कोहराम मच गया

देखते-देखते इलाके में कोहराम मच गया, लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे. कुछ तो बच गए लेकिन कई लोगों को आग ने अपनी चपेट में ले लिया.  प्रशासन भी हरकत में आया, प्रशासनिक अधिकारी भागे -भागे झरिया पहुंचे. डीसी, एसपी पूरे लाव लश्कर के साथ दिवाली मनाना छोड़ झरिया कूच कर गए. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. लेकिन तब तक बहुत बड़ा हादसा हो चुका था. उस समय सिंदुरिया पट्टी की बनावट कुछ ऐसी थी कि तंग गली में पटाखे की दुकान चलती थी और कहीं से चिंगारी निकली और पूरे झरिया शहर को तबाह कर दिया.

उस समय झारखण्ड नहीं बना था

उस समय यह बिहार का इलाका था. मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव धनबाद पहुंचे. उन्होंने झरिया का मुआयना किया, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और नौकरी की घोषणा की. कुछ को मुआवजा तो मिला लेकिन परिजनों को आज तक नौकरी नहीं मिली.  इसके बाद लगभग 10 सालों तक झरिया में पटाखा बिक्री पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन बाद में फिर पटाखों की बिक्री चालू हुई. उसी के बाद व्यवस्था बनी कि पटाखों की बिक्री भीड़भाड़ वाले इलाके के बजाय शहर से दूर किसी खुले स्थान पर की जाएगी. इस वर्ष धनबाद शहर में प्रशासन ने रणधीर वर्मा स्टेडियम और तेतुलतला मैदान में पटाखों की बिक्री की अनुमति दी है. 

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