धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल के स्थानीय उद्योगों को कोयला नहीं मिल रहा है और आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए कोयला चोरी कराया जा रहा है. धनबाद में टाटा की कोलियारिया भी है, वहां चोरी की एक भी घटनाएं नहीं होती है. इससे ऐसा लगता है कि बीसीसीएल मैनेजमेंट जानबूझकर कोयला चोरी कराता है. यह आरोप धनबाद के प्रतिष्ठित इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन में लगाया गया. कहा गया कि बीसीसीएल की वजह से कोयलांचल के हार्ड कोक उद्योग गंभीर संकट से जूझ रहा है.पूर्वी भारत में 25% जबकि देश के अन्य हिस्सों में 100000 टन से अधिक हार्ड कोक का उत्पादन प्रतिमाह होता है .एक समय था जब धनबाद में लगभग 200 उद्योग चल रहे थे, कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया ने उद्योग मालिकों को भी कोयला ट्रेडरो की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है. स्थानीय उद्योगों को जो सुविधाएं कोयला आवंटन में मिलती थी, उन्हें छीन लिया गया है. अब हार्डकोक उद्योग विदेशी कोयले पर निर्भर हैं, और वह कोयला इतना महंगा है कि उद्योग चलाना संभव नहीं है. नतीजा है कि 10 से 20% क्षमता पर उद्योग चल रहे हैं. ऐसे में अधिक दिनों तक खींचा नहीं जा सकता है और उद्योग मालिकों को इंडस्ट्री बंद करने के सिवा कोई विकल्प नहीं दिखता है. बता दें कि कोयलांचल में कोयला चोरी लाइलाज बीमारी हो गई है. ऊपर से रंगदारी का आलम यह है कि बिना रंग दारो की बात माने कोयला भी नहीं उठता है. बीसीसीएल लिफ्टिंग कराने में भी असफल रहता है.आवंटन होने के बाद गाड़ियां कोयला लोड होने के लिए जाती हैं फिर भी बीसीसीएल मैनेजमेंट और पुलिस गाड़ियां लोड नहीं करा पाते. रोज कहीं न कहीं विवाद और बवाल होता रहता है.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह,धनबाद
