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इस वैज्ञानिक के बदौलत शुरू हुआ टाटा स्टील का सफर, शहर आज मना रहा उनकी जयंती

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 12, 2026, 1:06:18 PM

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): आज जमशेदपुर में एक ऐसे महान वैज्ञानिक की जयंती मनाई जा रही है, जिनकी एक खोज ने न सिर्फ भारत के औद्योगिक इतिहास की दिशा बदली बल्कि जमशेदपुर को पहचान दी. भारतीय भू-विज्ञान के अग्रदूत माने जाने वाले प्रमथ नाथ बोस (पीएन बोस) सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वह दूरदर्शी व्यक्तित्व थे. उनकी सोच ने जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर को जन्म देने में अहम भूमिका निभाई. पीएन बोस ही वो व्यक्ति थे जिनकी खोज और सलाह ने टाटा स्टील की स्थापना की नींव रखी. 12 मई 1855 को पश्चिम बंगाल के गायपुर में जन्मे पीएन बोस ने अपने ज्ञान और शोध से उस दौर में नई पहचान बनाई, जब विज्ञान और उद्योग पर अंग्रेजों का वर्चस्व था. उन्होंने लंदन में गिलक्रिस्ट स्कॉलरशिप के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त की और प्रतिष्ठित रॉयल स्कूल ऑफ माइंस से प्रशिक्षण हासिल किया. इसके बाद वे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के शुरुआती भारतीय अधिकारियों में शामिल हुए. उस समय किसी भारतीय का इस क्षेत्र में इतनी बड़ी भूमिका निभाना अपने आप में ऐतिहासिक था. 

विशाल लौह अयस्क भंडार की खोज की
पीएन बोस ने  मयूरभंज के गुरुमहिसानी क्षेत्र में विशाल लौह अयस्क भंडार की खोज थी. यही खोज आगे चलकर टाटा स्टील की स्थापना का आधार बनी. वर्ष 1904 में उन्होंने जमशेदजी टाटा को एक पत्र लिखकर सिंहभूम और मयूरभंज क्षेत्र में उपलब्ध समृद्ध लौह अयस्क की जानकारी दी. उस समय टाटा समूह स्टील प्लांट लगाने के लिए दूसरे स्थानों पर विचार कर रहा था, लेकिन बोस के वैज्ञानिक विश्लेषण और प्रमाणों ने जमशेदपुर के साकची को सबसे उपयुक्त स्थान साबित किया. बाद में यही साकची विकसित होकर जमशेदपुर बना, जिसे आज देश की इस्पात नगरी कहा जाता है. पीएन बोस की उपलब्धियां केवल लौह अयस्क तक सीमित नहीं थीं. असम में पेट्रोलियम की खोज भी उन्होंने ही की थी. उन्होंने देश में स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पहली साबुन फैक्ट्री स्थापित करने में भी योगदान दिया. साथ ही तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही. उन्होंने बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट की स्थापना में अहम योगदान दिया. यह इंस्टीट्यूट आगे चलकर जादवपुर विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध हुआ. देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने भी पीएन बोस की सराहना की थी. 

शहर में दी गई श्रद्धांजलि 
शहर में आज पीएन बोस को 171वीं मनाई जा रही है. बिस्टुपुर स्थित यूनाइटेड क्लब के पास उनकी जयंती टाटा स्टील को ओर से मनाई गई। यहां स्थापित उनकी प्रतिमा पर लोगों ने श्रद्धांजलि दी. उनकी जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि उस वैज्ञानिक को नमन है, जिसने अपने शोध और दूरदृष्टि से भारत के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा दी. अगर पीएन बोस की खोज नहीं होती, तो संभव है कि जमशेदपुर और टाटा स्टील की कहानी कुछ और होती

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