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Tata Steel:आखिर क्यों पूर्वी सिंहभूम में ही जमशेदजी ने रखी टाटा कंपनी की नींव? पढ़ें विश्व की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी की स्थापना की पूरी कहानी 

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 11:07:46 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): टाटा इंडिया का सबसे विश्वसनीय उद्योग घराना है, जिस पर देश के लोगों के साथ विदेशी लोगों को भी अटूट विश्वास है, ये ऐसी कंपनी है, जो 20 रुपये के नमक से लेकर करोड़ों रुपये की गाड़ी तक का व्यपार करती है, इस कंपनी का इतिहास लगभग 150 साल पुराना है,इसका गौरवशाली इतिहास है, वहीं वर्तमान में ये टाटा ग्रुप कंपनी बहुत ही अच्छे फोर्म में रन कर रही है, 21 हजार रुपये से शुरु होनेवाली टाटा कंपनी आज 24 लाख करोड़ तक पहुंच गई है,लेकिन 150 साल का ये सफर इतना आसान नहीं है, इसके पीछे एक व्यक्ति की कड़ी मेहनत और लगन हैं, वो हैं टाटा ग्रुप के गॉडफादर जमशेदजी टाटा जिन्होने 1870 के दशक में टाटा ग्रुप कंपनी की साम्राज्य की नींव रखी..

इस वजह से जमशेदजी ने अपनी कंपनी के लिए पूर्वी सिंहभूम को बनाया ठिकाना 

वहीं सबसे बड़ा सवाल लोगों के दिल में उठता है कि आखिर क्यों जमशेद जी ने कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम को ही अपनी कंपनी के लिए सही जगह समझा और यहां विश्व की सबसे बड़ी स्टील और इस्पात कंपना की नींव रख दी, तो आपको बताये कि जमशेद जी ने जब टाटा कंपनी की नींव रखने की सोची, तो उन्हे पूर्वी सिंहभूम सबसे सटीक और सही लगा, क्योंकि ये ऐसी जगह थी जहां दो नदियों का संगम होता है.यहां कंपनी के लिए आसानी से पानी उपलब्ध था, तो वहीं कुछ दूरी पर ही कालीमाटी रेलवे स्टेशन था.जिसको आप आज टाटा नगर स्टेशन के नाम से जानते है.किसी भी कपंनी को उत्पाद करने के लिए पानी सबसे जरुरी चींज है, तो वहीं उस उत्पाद को बेचने के लिए आवागमन के लिए रेलवे स्टेशन या सड़क जरुरी है. इस जगह पर जमशेद जी को वो सारी मूलभूत सुविधाएं मिल गयी, जो किसी भी कंपनी को सफल रुप से चलाने के लिए जरुरी होती है.बस क्या था जमशेद जी ने अपनी कंपनी की नींव यहीं रख दी.

जमशेदजी ने एक खूबसूरत शहर बसाने की कल्पना की थी

एक तरफ जहां जमशेद जी को इस्पात कंपनी खोलने की इक्छा थी, तो वहीं वो एक ऐसे शहर को बसाने की कल्पना करते थे, जहां बहुत सारे पार्क हो, सड़क के किनारे ढ़ेर सारे हरे भरे पेड़ पौधे हो, वहीं खेल के शौकिन लोगों और बच्चों के लिए उचित खेलने की व्यवस्था हो.उसी शौक और कल्पनाओं का परिणाम है कि जमशेद जी के जाने के बाद भी उनके पुत्र दोराबजी ने जमशेदपुर जैसे खूबसूरत शहर को बसाया और सजाया संवारा.आज इस शहर की पहचान विश्व भर में है.जिसकी खूबसूरती देखने के लिए विश्व भर से लोग यहां आते है.जुबली पार्क, निको पार्क, वॉटर पार्ट, मोदी पार्क, जेआरडी स्पॉर्टस कॉम्पलेक्स जमशेद जी की कल्पना की देन है.इस शहर के सड़क किनारे आपको हरे भरे लहलहाते पेड़ मिल जायेंगे, जो पार्यावरण के साथ शहर को खूबसूरती को बढ़ाते है.

आज पूरी सफलता के साथ टाटा ग्रुप 29 कंपनियों का संचालन करती है

आज टाटा दुनिया की एकमात्र ऐसी कंपनी है, जिसने सबसे पहले अपनी कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों को भत्ता देने की शुरुआत की थी,इस कंपनी में काम करना हर युवा का सपना होता है, क्योंकि जितना ख्याल टाटा कंपनी अपने कर्मचारियों को रखती है,शायद ही कोई प्राईवेट कंपनी रखती होगी, वहीं इस कंपनी के आगे लोग सरकारी नौकरी को भी अहमियत नहीं देते है, क्योंकि टाटा कंपनी अपने मुनाफे के साथ अपनी कपंनी के छोटे से छोटे कर्मचारी का ख्याल रखती है.आज की तारीख में टाटा ग्रुप 29 कंपनियों का संचालन करती है.जिसमे टाटा मोटर्स, वोल्टास, टाटा कम्युनिकेशन, टाटा एलेक्सी, टीसीएस, टाइटन, टाटा पावर, टाटा केमिकल्स शामिल है.   

महज 21 हजार रुपये से की गई थी कंपनी की शुरुआत

अब जान लेते है कि विश्व की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाने में कितने लोगों की कड़ी मेहनत है, तो आपको बताये कि   टाटा ऐसी कंपनी है, जिसके बारे लगभग हर किसी को जानकारी है, क्योंकि जाने या अनजाने में सभी इस कंपनी के प्रोडक्ट उपयोग करते है, लेकिन बहुत से लोग इस कंपनी के पीछे की कहानी, संघर्ष और इसके पीछ के रियल हीरो के बारे में नहीं जानते होंगे, तो आज हम आपको टाटा कंपनी के हर उस पहलू से आपको रुबरु करायेंगे, जिससे आप अनजान है. आपको बताये कि टाटा कंपनी के मालिक जमशेद जी टाटा ने इस कंपनी की शुरुआत 1870 में की थी,  जमशेद जी टाटा मुख्य रुप से गुजरात के रहनेवाले थे, इनका जन्म गुजरात के नवसारी में हुआ था.उन्होने 29 साल की उम्र में महज 21 हजार रुपये की छोटी रकम से बॉम्बे में एलेक्जेंड्रा मिल की स्थापना की, लेकिन आगे उनके सामने कई परेशानियां और कठिनाईयां आई, जिसका उन्होने डटकर सामना किया, और अपनी मेहनत से भारत में औद्योगिक क्रांति ला दी.    

जमशेद जी के बाद उनके बड़े बेटे दोराबजी ने संभाली कंपनी की कमान

 जमशेदजी ने 1880 से 1904 तक आखिरी सांस तक टाटा ग्रुप को खड़ा करने में लगे रहे, अपने जीते जी उन्होने  शैक्षणिक संगठन से लेकर स्टील और मोटर इंडस्ट्री स्थापित कर चुके थे.वहीं इसके बाद जमशेदजी टाटा के बड़े बेटे सर दोराबजी टाटा ने 1904 में टाटा समूह के दूसरे अध्यक्ष बनाये गये, इनके नेतृत्व में भी टाटा ग्रुप ने काफी तरक्की की, वहीं इसके साथ ही देश के विकास में कई योगदानों दिया. जिसमे टाटा स्टील और टाटा पावर की स्थापना शामिल है,वहीं  सर दोराबजी टाटा ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की भी स्थापना की जिसकी वजह से टाटा परोपकार की परंपरा का जन्म हुआ.  

नौरोजी टाटा ने क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना की

वहीं सर दोराबजी टाटा के बाद टाटा कंपनी ग्रुप की बागडोर सर नौरोजी टाटा को सौंपी गई.जो टाटा समूह के तीसरे अध्यक्ष बनाये गये. सर नौरोजी टाटा ने 1889 में टाटा के कर्मचारी के रूप में अपनी यात्रा की शुरूआत की, जिसके लंबे समय के बाद सर नौरोजी को साल 1932 में टाटा समूह के अध्यक्ष का पद सौंपा गया.आपको बताये कि सर नौरोजी कर्मचारी कल्याण के उत्साह से प्रेरित थे, वह चाहते थे कि कर्मचारी कंपनी की समृद्धि को साझा करें, इसलिए, उन्होंने एक लाभ-साझाकरण योजना शुरू की,वहीं सर नौरोजी खेलों के भी शौकिन थे, जिसमे सबसे पसंदीदा क्रिकेट था. सर नौरोजी टाटा ने कई संस्थाओं के निर्माण में मदद की जिसमे क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया भी शामिल है.इन्होने ने भी अपने कर्तव्य को बखूबी निभाया, और कंपनी को उंचाई पर ले गये.

जेआरडी टाटा ने टीएमएच के साथ कई इंस्टीट्यूट को खोला

वहीं इसके बाद जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा को कंपनी की जिम्मेदारी सौंपी गई, इनकी खासियत थी कि ये वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस प्राप्त करनेवाले पहले भारतीयों में से एक थे. जेआरडी टाटा को 1938 में टाटा समूह का अध्यक्ष बनाया गया.इनको जब पंकनी की बोगडोर सौंपी गई तो वो कंपनी के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने, वहीं सबसे लंबे समय तब समूह की सेवा करने वाले अध्यक्ष भी बने. जेआरडी टाटा ने 50 सालों से अधिक सालों तक कपंनी का नेतृत्व किया.जिनकी देन भारत की कई प्रमुख संस्थाएं है.जिसमे टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल टीएमएच, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स इन इंडिया खोलने में मदद की शामिल है.

1991 में रतन टाटा को कंपनी की कमान सौंपी गई

वहीं जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा के बाद रतन टाटा को 1991 में टाटा समूह का पांचवां अध्यक्ष बनाया गया.जो साल 2024 तक एमेरिटस अध्यक्ष थे, जिनकी 86 साल की उम्र में 9 अक्टूबर को निधन हो गया.रतन टाटा 1962 में एक सहायक के रूप में कंपनी में शामिल हुए और अपने तरीके से काम किया.जिस समय रतन टाटा ने टाटा ग्रुप के अध्यक्ष का पद संभाला उस समय तक टाटा कंपनी असमान रूप से प्रबंधित और नौकरशाही था, जिसके बाद रतन टाटा ने टाटा कंपनी का कायाकल्प कर दिया. जैसी आज टाटा कंपनी है. रतन टाटा ने कई हाई-प्रोफाइल अधिग्रहण भी किए, जिसमे जगुआर लैंड रोवर, जगुआर लैंड रोवर, टेटली, कोरस, और देवू शामिल है.

आज टाटा कंपनी यूके में नंबर 1 आईटी कंपनी भी बन गई है

वहीं रतन टाटा के बाद नटराजन चंद्रशेखरन को 2017 में टाटा समूह का अध्यक्ष बनाया गया. ये पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य परिचालन अधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, वहीं इसके साथ नटराजन चंद्रशेखरन टाटा समूह कंपनी का  नेतृत्व करनेवाले पहले गैर-पारसी और पेशेवर कार्यकारी हैं. इनके नेतृत्व में टीसीएस भारत की सबसे मुनाफे में चलनेवाली मूल्यवान कंपनी बनी हुई है, और यूके में नंबर 1 आईटी कंपनी भी बन गई है.

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