धनबाद(DHANBAD): बेचारे, उस पिता को क्या मालूम था कि जिन बच्चों को नक्सली और रणवीर सेना से बचाने के लिए गांव छोड़कर धनबाद के राजगंज आये, उनके वही बच्चे एक दूसरे की हत्या करवा देंगे. यह कहते- कहते रोने लगते हैं. राजगंज (धनबाद) के फैक्ट्री मालिक ज्योति रंजन के पिता अनिल शर्मा. इतना ही नहीं, जिस समय थाने में वह श्राद्ध कर्म के लिए 'क्रिया' ले रहे थे ,उस समय भी वह फूट-फूट कर रो रहे थे. वह लगातार कह रहे थे कि उन्हें क्या मालूम कि यह दिन भी उन्हें देखना होगा. अंदाज लगाया जा सकता है कि वह पिता उस वक्त किस दौर से गुजर रहा होगा और आज भी किस दौर से गुजर रहा होगा. एक बेटे की मौत हो गई है और दूसरा बेटा उसी की हत्या के आरोप में जेल जा चुका है. वैसे अनिल शर्मा श्राद्ध कर्म की रस्म को पूरा करने के लिए अपने गांव अरवल (बिहार) चले गए हैं और वहीं श्राद्ध की शेष विधियां पूरी करेंगे.
धनबाद के राजगंज के खरनी मोड़ पर 29 सितंबर की रात पत्नी और बेटे के सामने जूस कारोबारी ज्योति रंजन की हत्या कर दी गई थी. कांड में मृतक का भाई और उसका एक करीबी जेल जा चुका है. बिहार से दो शूटर गिरफ्तार कर लिए गए है. संपत्ति के लालच में ज्योति के छोटे भाई सौरभ कुमार ने ही अपने दोस्त के साथ मिल कर हत्या की साजिश रची थी. सौरभ कुमार ने बड़े भाई ज्योति रंजन की शूटरों की मदद से हत्या कराने के बाद खुद ही राजगंज थाना में अज्ञात के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराइ. उसी ने मृतक ज्योति रंजन को मुखाग्नि भी दी. वह बार-बार राजगंज थाना में पुलिस के समक्ष दुहाई देता रहा कि उसे छोड़ दें, वह भाई की आत्मा शांति के लिए नियमपूर्वक श्राद्ध करना चाहता है. ज्योति रंजन की हत्या में पुलिस को मोबाइल कॉल डिटेल्स से काफी मदद मिली. कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस सौरभ के दोस्त श्रीकांत मिश्रा तक पहुंची. पुलिस को सौरभ पर शुरू से शक था. वह बार-बार अपना बयान बदल रहा था.
