TNP DESK-: जहां लोग जाकर जिंदगी की पूरी सच्चाई जानते हैं, जहां से आकर शुद्ध होने के लिए कई विधि- विधान किए जाते है. शमशान घाट में पढ़कर एक बच्ची ने मैट्रिक में पहली श्रेणी से सफल हुई है. आपको यह सुनकर आश्चर्य लगेगा, लेकिन जब पूरी कहानी जानेंगे तो आपका भी मन भी बच्ची की साहस और शिक्षक के जुनून को सलाम करेगा. दरअसल, आमतौर पर लोग अंतिम विदाई देने के लिए श्मशान घाट जाते हैं, लेकिन वहीं से पढ़ कर एक बच्ची निकल कर समाज को सोच में बदलाव लाने को मजबूर किया है. वह बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में 454 अंक प्राप्त की है.
मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्थित मुक्तिधाम की है कहानी
दरअसल, बिहार के मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्थित मुक्तिधाम में शिक्षक सुमित कुमार के नेतृत्व में एक अनोखा स्कूल चलता है. यहां श्मशान घाट के पास रहने वाले गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाया जाता है. पास करने वाली छात्रा माही तीसरी कक्षा से यहां पढ़ रही थी. यानी 7 वर्षों से वह पढ़ाई कर रही थी. इसी वर्ष माही के साथ निशा ने भी मैट्रिक की परीक्षा दी और दोनों ने पहली श्रेणी में सफलता हासिल की. माही ने बताया कि वह रोज 8 से 10 घंटे की पढ़ाई करती थी और प्रतिदिन पाठशाला जाती थी. उसने अपनी इस सफलता का श्रेय शिक्षक सुमित कुमार और अपने माता-पिता को दिया है.
परिवार गरीब है लेकिन पढ़ाई का जुनून उसपर भी भारी
माही के पिता सब्जी बेचने का काम करते हैं और मां मजदूरी करती है. इतनी कठिन परिस्थितियों में भी परिवार ने माही की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखा. माही का सपना आगे पढ़कर सिविल सर्विसेज में जाना है. माता -पिता का कहना है कि बेटी के परीक्षा परिणाम ने पूरे परिवार को एक नई उम्मीद दे दी है. कठिन परिस्थितियों में भी बेटी ने उनका सपना पूरा किया है. कहा कि अब उनकी बेटी जो बनना चाहेगी, हम पूरी ताकत से उसके साथ खड़े रहेंगे। शिक्षक सुमित कुमार ने बताया कि पिछले साल तीन छात्राएं पास की थी. इस बार दो और बच्चियों ने परचम लहराया है. उनका लक्ष्य श्मशान घाट के अगल-बगल रहने वाले गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा देना है. लगातार मिल रही सफलता से उनके संकल्प को और मजबूती मिली है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो