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ऐसा ज्योर्तिलिंग जहां शक्तियों से घिरे हैं भोलेनाथ, पूजा करने से मिलता है शिव-सती दोनों का आशीर्वाद

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 12:07:36 AM

देवघर(DEOGHAR):देवघर स्थित बैद्यनाथधाम अपनी कई रहस्यमई विशिष्टताओं के लिए बाकी तीर्थस्थल से अपनी अलग पहचान रखता है. कहा जाता है कि बैद्यनाथ धाम की पहचान भले ही द्वादश ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है. लेकिन वास्तव में यहां शक्ति की प्रधानता रही है. माता सती का हृदय यहां गिरने की वजह से पहले ये शक्तिपीठ कहलाया बाद में पवित्र ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान विष्णु ने की. यही एक मात्र द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं, जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं. जानकारों के अनुसार बाबा बैद्यनाथ के चारों ओर भी शक्ति स्वरुपा स्थापित है. यह इस धाम की खास विशेषताओं में एक है.

ऐसा ज्योर्तिलिंग जहां शक्तियों से घिरे है भोलेनाथ

देवाधिदेव महादेव की धरती देवघर बैद्यनाथधाम देश के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग में एक है. यहां स्थापित पवित्र ज्योतिर्लिंग को मूल लिंग भी कहा जाता है. लेकिन जानकारों के अनुसार इससे भी पहले इसकी पहचान शक्तिपीठ के रूप में रही है. विद्वानों के अनुसार माता सती का हृदय यहां गिरने के बाद उसकी रक्षा के लिए बैद्यनाथ को यहां भैरव के रूप में स्थापित किया गया. एक युग बाद जब रावण कैलाश से ज्योतिर्लिंग लेकर यहां पहुंचा तब भगवान विष्णु ने बैद्यनाथ नाम से शिवलिंग की यहां स्थापना की. देश के 52 शक्तिपीठों में एक शक्तिपीठ के रुप में भी इस पवित्र स्थल की मान्यता है.

पूजा करने से मिलता है शिव-सती दोनो का आशीर्वाद

जानकारों के अनुसार जहां बैद्यनाथ स्थापित हैं उनके चारों दिशा में शक्ति स्वरुपा देवी स्थापित हैं.उनके अनुसार यहां दसों महाविद्या का सार्थक और सौम्य स्वरुप विराजमान हैं. समस्त ब्रह्माण्ड का कल्याण करने वाली है, वो सब देवी यहां शक्ति स्वरुपा विद्यमान हैं. मंदिर प्रांगण स्थित मुख्य मंदिर के सामने माता त्रिपुर सुंदरी उनके बाई ओर माता संध्या फिर बगल में मनसा देवी के बाद सरस्वती मां के बगल में मां बगुलामुखी फिर, तारा, काली, अन्नपूर्णा देवी इत्यादि.

52 शक्तिपीठों में में भी होती है गिनती

जानकारों के अनुसार सतयुग से ही यहां शक्ति की उपासना होती रही है. बड़े-बड़े साधक यहां पहुंचे और अपनी साधना से बहुत कुछ उन्होंने यहां प्राप्त किया. शक्तिपीठ होने की वजह यहां शक्ति और भैरव दोनों स्थापित हैं. खास बात है कि जिस मूल स्थल पर महादेव और आदि शक्ति स्वरूपा मां त्रिपुर सुंदरी उमा स्थापित है, उसके चारों ओर सुरक्षा कवच के रूप में दसों महाविद्या की देवी और भैरव को स्थापित किया गया है.

यहां होता है शिव,शक्ति और भैरव का अद्भुत संगम

शिव,शक्ति और भैरव के इस अद्भुत संगम की वजह से इस स्थल पर पहुंच कर अलग ऊर्जा की अनुभूति होती है. यही वजह है कि नियम और निष्ठा से उपासना करने पर यहां याचक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. देश-विदेश से बाबा का जलाभिषेक करने देवघर आने वाले बहुत कम श्रद्धालुओं को शायद इस बात की जानकारी होगी, कि देश के सभी द्वादश ज्योतिर्लिंग में सिर्फ बैद्यनाथधाम ही ऐसा तीर्थ स्थल है. जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान है. इस शिवधाम की इन्हीं विष्टताओं के कारण इसे कामना लिंग भी कहा जाता है.यही वजह है कि प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में यहाँ श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी मन की मुरादे पूरी कर लौटते है.

रिपोर्ट-रितुराज सिन्हा

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