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कोयला उद्योग में हलचल : मजदूर संगठन भारी कि मैनेजमेंट ,उत्पादन का आंकड़ा सबकुछ कर देगा साफ़!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: February 12, 2026, 1:28:26 PM

 

धनबाद(DHANBAD) | आज भारत बंद का आह्वान  है.  यह  आह्वान  केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कई किसान संगठनों ने किया है.  इसका असर कोयला उद्योग पर दिखने लगा है. बैंकिंग सेक्टर भी प्रभावित हुआ है. झारखंड में संचालित बीसीसीएल, ईसीएल  और सीसीएल के साथ बैंक भी प्रभावित क्षेत्र में हैं.  इन ट्रेड यूनियनों ने बंद  का आह्वान किया है.  इस हड़ताल का असर कोयला उद्योग पर दिखने लगा है.  धनबाद की अगर बात की जाए तो बीसीसीएल में लगभग 32,000 कोयला कर्मी   कार्यरत हैं.  वैसे, कितना उत्पादन प्रभावित हुआ और मैनेजमेंट हड़ताल को कमजोर करने में कितना सफल हुआ, इसका आंकड़ा शाम तक मिल सकता है.  वैसे, बीसीसीएल में कोयला भवन के साथ-साथ सभी क्षेत्रीय स्तरों पर कंट्रोल रूम बनाया गया है. 

मैनेजमेंट की क्या है तैयारी ,क्यों है कड़ा रुख 

 इसकी जिम्मेवारी अधिकारियों की टीम को दी गई है.  यह  टीम हर शिफ्ट  में तैनात रहेगी।  यह  कंट्रोल रूम आज यानी 12 फरवरी की पहली पाली से लेकर तीसरी पाली के अंत तक लगातार रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे।  एरिया में सीआईएसएफ और क्यू आर टी  टीम की तैनाती की गई है.  हड़ताल के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने और कानून -व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष टीम और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है.  इस हड़ताल में भारतीय मजदूर संघ शामिल नहीं है.  प्रबंधन ने  आह्वान किया था कि अगर कोई भी व्यक्ति श्रमिकों को जबरदस्ती हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य करते हैं, हाजिरी बनाते हैं और उन्हें रोकते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  बता दें कि इस हड़ताल का सबसे अधिक असर कोयला उद्योग पर पड़ सकता है. 

कोयला उद्योग पर बढ़ गया है उत्पादन का दबाव ----
 
कोयला  उद्योग पर फिलहाल उत्पादन को लेकर भारी दबाव है.  कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियां उत्पादन लक्ष्य से लगभग पीछे चल रही हैं.  कोयला मंत्रालय से लेकर कोल इंडिया के अध्यक्ष तक इस मामले को गंभीरता से लिया है और उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार कोयला कंपनियों के अधिकारियों से संपर्क में है.  इस बीच यह  हड़ताल कोयला उद्योग को नुकसान करेगा।  वैसे प्रबंधन इस  हड़ताल को विफल  करने के लिए हर संभव प्रयास किया है.  हड़ताल के दिन भी कर रहा है.  कर्मियों को काम  पर जाने के लिए प्रेरित करने, उन्हें सुरक्षा देने, कर्मियों की छुट्टी रद्द करने तक की कार्रवाई किया है.  दूसरी ओर श्रमिक संगठन भी हड़ताल को सफल करने में डटे हुए है. 

किन -किन ट्रेड यूनियन ने किया है हड़ताल का आह्वान ---

संयुक्त मोर्चा जिसमें लगभग 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन शामिल हैं- जैसे INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF, UTUC आदि, संयुक्त किसान मोर्चा  और कई किसान संघों ने भी इस बंद का समर्थन किया है. दूसरी ओरे बुधवार को राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के महामंत्री  ए के झा एवं कार्यकारी अध्यक्ष  बृजेंद्र प्रसाद सिंह  ने संयुक्त प्रेस व्यक्तव्य में कहा था  कि भाजपा सरकार की मजदूर विरोधी और पूंजीवादी समर्थन नीतियों के खिलाफ देश के तमाम यूनियन फेडरेशन ने संयुक्त मोर्चा के तहत 12 फरवरी को देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल का आह्वान  किया है.  इस हड़ताल को देश के संयुक्त किसान मोर्चा, खेतिहर  मजदूर यूनियन के साथ-साथ इंडिया गठबंधन के सभी राजनीतिक दलों ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है.     

क्यों नाराज हैं कर्मी और मजदूर  संगठन ----

उन्होंने  कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने ट्रेड यूनियन की आवाज को दबाने का काम किया है.  उनके साथ संवाद न करके बिना चर्चा के चार लेबर कोड को जबरन लागू करने का एक तरफा फैसला लिया है, जो दुखद एवं आश्चर्यजनक है.  सरकार ने मजदूरों के सामने जीवन मरण का प्रश्न खड़ा कर दिया है.  मौलिक अधिकार का हनन किया है.  संवैधानिक, लोकतांत्रिक अधिकार को छिनने का काम किया है.  हड़ताल के अधिकार छिने जा रहे हैं.  लेबर कोर्ट, आरएलसी, सीएलसी के अधिकार सीमा को प्रतिबंधित किया जा रहा है.  मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की राजनीतिक साजिश हो रही है.  पीएफ, पेंशन ,सामाजिक सुरक्षा, ग्रेच्युटी के लाभ से वंचित किया जा रहा है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Tags:DhanbadHadtaalSangathanPrabhawManagement

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