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करोड़ों की योजनाएं धरी रह गईं, लेकिन नहीं रुका जंगली हाथियों का उपद्रव

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 2, 2026, 11:58:25 AM

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR):  जंगली हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है. पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले में हाथियों का उपद्रव रोकने के लिए वन विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च कर कई योजनाएं चलाईं. लेकिन नतीजा अब तक बेअसर साबित हुआ है. मधुमक्खी पालन, सोलर फेंसिंग, पाराब्रक्ष लाइट, सोलर स्ट्रीट लाइट जैसे उपाय किए गए. इसके बाद भी हाथियों का उपद्रव नहीं रुक रहा है. दोनों जिलों के अलग-अलग इलाकों में इस समय 50 से अधिक जंगली हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है. हर दिन किसी न किसी गांव में हाथियों के पहुंचने की खबर मिल रही है. हाथी ना सिर्फ खेतों में लगी फसल रौंद रहे हैं या घरों को तोड़ रहे हैं बल्कि लोगों की जान भी ले रहे है. हाथियों के कारण शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे है. ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के भी हाथियों का उपद्रव नहीं रुका है. 

मधुमक्खियों की दीवार भी नाकाम

पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया रेंज में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए वन विभाग ने अनोखा प्रयोग किया था. चौठिया गांव में मधुमक्खी पालन आधारित सुरक्षा व्यवस्था शुरू की गई थी. इसके तहत गांव के चारों ओर करीब 300 मधुमक्खी बॉक्स लगाए गए, ताकि हाथियों की आवाजाही रोकी जा सके. इस योजना को लागू करने के लिए हंबल-बी संस्था की टीम को जिम्मेदारी दी गई थी. बॉक्सों में आंध्रप्रदेश से लाई गई सेरेना इंडिका प्रजाति की लगभग डेढ़ लाख मधुमक्खियां छोड़ी गई थीं. प्रत्येक बॉक्स में औसतन पांच हजार मधुमक्खियां रखी गईं थी. वन विभाग का मानना था कि मधुमक्खियों की भनभनाहट और डंक के डर से हाथी गांव की ओर आने से बचेंगे. शुरुआत में इस योजना से काफी उम्मीदें जताई गई थीं, लेकिन जमीन पर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले.

सोलर फेंसिंग भी बेअसर

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र में जंगली हाथियों का उपद्रव रोकने के लिए वन विभाग ने सौर आधारित फेंसिंग योजना शुरू की थी. नीमडीह प्रखंड की गुंडा पंचायत अंतर्गत रामनगर गांव की सीमा पर करीब एक किलोमीटर लंबी सोलर फेंसिंग लगाई गई. यह वही इलाका था, जहां से हाथी अक्सर खेतों और बस्तियों में प्रवेश कर फसल व संपत्ति को नुकसान पहुंचाते थे. फेंसिंग में 12 वोल्ट की हल्की करंटयुक्त सोलर तारें लगाई गई थीं. विभाग का दावा था कि यह करंट हाथियों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि हल्का झटका देकर उन्हें गांव की ओर बढ़ने से रोकेगा और जंगल की तरफ लौटने पर मजबूर करेगा. हालांकि, योजना से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजे संतोषजनक नहीं रहे. सोलर फेंसिंग के बावजूद हाथियों का गांवों में प्रवेश और नुकसान की घटनाएं जारी हैं.

रोशनी का इंतजाम भी बेअसर 

जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही और ग्रामीण इलाकों में हो रहे नुकसान को रोकने के लिए वन विभाग ने चांडिल और चाकुलिया रेंज में पाराब्रक्ष लाइट और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाएं लागू की थीं. उद्देश्य था कि रात के समय रोशनी रहने से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उन्हें गांवों की ओर बढ़ने से रोका जा सके.
चाकुलिया रेंज के 45 गांवों में कुल 450 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। इनमें महलबेड़ा, माचाडीह, दक्षिणशोल, चौठिया, जमीरा, बड़ामचाटी, कलसीमुंग, राजाबासा, इंदबनी, जमुआ, बड़ामारा समेत कई गांव शामिल थे. इसके अलावा चाकुलिया के राजाबासा और चांडिल के नीमडीह क्षेत्र में पाराब्रक्ष लाइट भी लगाई गई थी. हालांकि, ये दोनों योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं. रोशनी के इंतजाम के बावजूद हाथियों का उपद्रव जारी है और ग्रामीण इलाकों में दहशत बनी हुई है.

यहां है हाथियों का कहर

पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला खरसावां दोनों जिलों में जंगली हाथियों का उत्पात है. पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया रेंज में एक दर्जन से अधिक हाथी उपद्रव मचा रहा है. जबकि घाटशिला के सीमावर्ती इलाकों में 30 हाथियों का झुंड उत्पात मचा रहा है. वही, सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल रेंज के चांडिल, नीमडीह और ईचागढ़ प्रखंड में 2 दर्जन से अधिक हाथियों का उपद्रव है. वन विभाग लोगों को हाथियों से  सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रहा है. 
 

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