धनबाद(DHANBAD): कोयला उद्योग का 1971 और 1973 में जब राष्ट्रीयकरण हुआ था, उस समय मजदूरों की जो हालत थी, धीरे-धीरे कोल इंडिया उसी ओर बढ़ रहा है. कहने के लिए तो यह पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है, लेकिन सब काम व्यावसायिक ढंग से किए जा रहे हैं. नतीजा है कि रेगुलर कोयला मजदूरों की संख्या घट रही है और आउटसोर्सिंग कंपनियों का दखल बढ़ रहा है. धनबाद में संचालित बीसीसीएल की बात की जाए तो 80% से अधिक कोयले का उत्पादन आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से हो रहा है.
पहली छमाही में कोल इंडिया में कुल 5343 मैनपॉवर घटा
इस वित्तीय वर्ष की पहली छमाही की बात की जाए तो कोल इंडिया में कुल 5343 मैनपॉवर घटा है. सबसे अधिक कर्मियों की संख्या बीसीसीएल और सीसीएल में घटी है. पहली छमाही की जो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है, उसके अनुसार अप्रैल 2023 में कोल इंडिया एवं अनुषंगी कंपनियों में कुल मैनपॉवर दो लाख 39 हजार 210 था. सितंबर 2023 में घटकर यह 2 लाख 33 हजार 867 रह गया है. यानी 5343 मैनपावर की कमी हुई है .यह अलग बात है कि कोयला कर्मियों की संख्या में कमी कंपनियों के लिए आर्थिक राहत भरी बात हो सकती है. वेतन आदि के मद में कंपनियों का खर्च कम हुआ है. कोयला वेतन समझौता 11 के वित्तीय भार से भी बहुत हद तक राहत जरूर मिली होगी. लेकिन जिस रफ्तार में मजदूरों की संख्या घट रही है और नई बहाली नहीं हो रही है, ऐसे में वह दिन दूर नही जब यह उद्योग राष्ट्रीयकरण के पूर्व की हालत में पहुंच जाए. बीसीसीएल में अप्रैल 2023 में 37037 मजदूर थे, जो सितंबर में घटकर 35,258 रह गए है.
रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो
