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Shootout @1988 : जमाना था सूर्यदेव सिंह का, एसके राय तो बच गए लेकिन मारे गए उमाकांत सिंह !

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 11:01:43 AM

धनबाद (DHANBAD) : वो जमाना सूर्यदेव सिंह का था. उस समय रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि सूरज की रोशनी में हत्याएं होती थी.  ऐसी ही हत्याएं हुई थी एक फरवरी 1988 को. जगह था धनबाद का लुबी सर्कुलर रोड. उस वक्त इसे राजेंद्र पथ कहा जाता था.  धनबाद एसपी आवास से लगभग 50 मीटर दूर स्थित राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ में शूटआउट की घटना हुई थी. इस घटना में सैकड़ों लोगों की आंखों के सामने चार लोग मौत के घाट उतार दिए गए थे.  यह घटना इसलिए भी आश्चर्य करने वाली थी कि 50 मीटर की दूरी पर एसपी आवास था.  ठीक सामने स्थित माडा कार्यालय के कर्मचारी अभी ऑफिस में प्रवेश ही कर रहे थे  कि घटना को अंजाम दे दिया गया और लाशें गिराने  के बाद निडर होकर निकल भी गए. असल में हमलावर आए थे राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के कद्दावर नेता एसके राय की हत्या करने. 

7 जनवरी 1988 को एसके राय ने दी थी खुली चुनौती 

7 जनवरी 1988 को एसके राय ने सूर्यदेव सिंह के गढ़ बोर्रागढ़ में सभा कर सूर्यदेव सिंह को खुली चुनौती दी थी. यह भला सूर्यदेव सिंह कैसे बर्दाश्त करते. एक फ़रवरी को एसके राय को ही मारने का प्लान था, लेकिन मारे गए कोयलांचल के अजातशत्रु कहे जाने वाले उमाकांत सिंह. हमलावर दो एम्बेसडर गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे थे और उतरते ही सीधे कार्यालय परिसर में प्रवेश कर गए.  प्रवेश करते ही सामने उनकी नजर एसके राय की गाड़ी पर पड़ी.  फिर क्या था, गाड़ी पर तो गोलियों की बरसात की ही गई. गाड़ी में बैठे तीन लोग वहीं निढाल हो गए. अताताई सीढ़ी चढ़ते हुए ऊपर गए, उन्हें देख पोटिको में बैठे लोग जहां-तहां जान बचाने को  छुप गए. एसके राय, सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह सहित कई लोग एक कमरे में मौत की घड़ियां गिनने लगे. लेकिन, वहां तक हमलावर पहुंच नहीं पाए. अपने कार्यालय कक्ष में बैठे उमाकांत सिंह को ही एसके राय समझकर हमलावरों ने गोलियां दाग दी.  उन्हें इलाज के लिए वाया दिल्ली पुणे ले जाने की तैयारी थी कि रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया. 

और लाशें गिराना चाहते थें हमलावर 

हमलावर 3 लोगों को मारने तथा उमा बाबू को घायल करने के बाद और लाशें गिराने के फ़िराक में थे. लेकिन एसके राय के साथ साए की तरह चलने वाले उनके बॉडीगार्ड ने फायरिंग शुरू कर दी. अपने को घिरते देख हमलावर पीछे भागे और गाड़ी में सवार होकर निकल गए. उमाकांत सिंह घायल थे और तीन लाशें पड़ी हुई थी.  एसपी आवास के बगल में दिनदहाड़े दबंगई के साथ की गई इस हत्याकांड से धनबाद दहशत में पड़ गया था. राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के किसी नेता ने इस संबंध में धनबाद थाने में एफआईआर भी कराई थी. उस मामले  में यह जिक्र था कि यह हत्याकांड सूर्य देव सिंह के इशारे पर किया गया है. 

रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद

Tags:News

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