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धनबाद के बाज़ारों का हाल देखिये -सरकारी खजाना भरा हुआ, चेंबर भी धनाढ्य लेकिन एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:09:34 PM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद के सरकारी खजाने में पैसे की कोई कमी नहीं है. डीएमएफटी फंड में भी पैसा है, निगम के पास भी विकास कार्यों के लिए राशि पर्याप्त है, धनबाद का चेंबर ऑफ कॉमर्स भी धनाढ्य है, विधायक फंड भी होता है. बावजूद शहर के हीरापुर ,पुराना बाजार ,बैंक मोड बाजार में  एक भी सार्वजनिक शौचालय काम नहीं कर रहे हैं. इस बात की पुष्टि पुराना बाजार चेंबर  के अध्यक्ष अजय नारायण लाल भी करते हैं. वह कहते हैं कि पिछले 10 वर्षों से पुराना बाजार की हालत सुधारने के लिए पत्राचार कर रहे हैं, अधिकारियों से मिल रहे हैं, नेताओं से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन स्थिति यह है कि जैसे-जैसे दवा की, मर्ज बढ़ता गया और आज मर्ज इतना अधिक बढ़ गया है कि अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है.

पुराना बाजार में लगभग  2000 छोटी-बड़ी दुकानें होंगी

धनबाद के पुराना बाजार में लगभग  2000 छोटी-बड़ी दुकानें होंगी, बैंक मोड में भी 1200  से 1500 छोटी-बड़ी दुकानें है.  शोरूम भी है , बड़े -बड़े मॉल खुले हुए है.  हीरापुर बाजार में भी 1000 से कम दुकाने नहीं होंगी.  लेकिन यहां एक भी सार्वजनिक शौचालय काम नहीं करता है. हीरापुर विवेकानंद चौक के पास तो एक सार्वजनिक शौचालय है लेकिन वह सुविधा कम और परेशानी अधिक पैदा करता है. चिल्ड्रेन  पार्क  में एक पेड  शौचालय है लेकिन उसकी दूरी अधिक है. धनबाद में जो मॉड्यूलर शौचालय के कांसेप्ट पर काम हुए , वह अभी कारगर साबित नहीं हो रहा है. यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि त्योहारी सीजन को अगर छोड़ भी दें तो रोज इन बाजारों से 10 -12 करोड़ रुपए का कारोबार होता है.  कारोबारियों के भी इसी बाजार से घर परिवार चलता है. खरीदार भी जाते हैं लेकिन साफ- सुथरा सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से लोगों को कितनी परेशानी होती है ,इसको शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है.

चेंबर के पास भी पैसे की कोई कमी नहीं 

धनबाद का चेंबर ऑफ कॉमर्स भी गरीब नहीं है. उसके पास भी पैसे की कोई कमी नहीं है.  चेंबर के पदाधिकारी भी हर एक काम में सक्रिय रहते हैं, सामाजिक कार्यों में उनकी रूचि होती है बावजूद बाजारों में एक अदद  सार्वजनिक शौचालय का नहीं होना, आश्चर्य पैदा करता है. शौचालय के लिए स्थान चिन्हित करने में चैंबर को  परेशानी हो सकती है ,क्योंकि लोग अपनी जगह पर शौचालय का विरोध कर सकते हैं.स्थान चयन करने में प्रशासनिक अधिकारियों की मदद ली जा सकती है. लोग कह सकते हैं कि जब सब काम के लिए टैक्स देते हैं तो दायित्व सरकारी एजेन्सियों  का है. बहरहाल, ढिलाई चाहे जिस स्तर पर हो ,लेकिन बाज़ारों में  सार्वजनिक शौचालय का नहीं होना ,व्यवस्था के नाम पर कलंक के सिवा और कुछ भी नहीं कहा जा सकता .  

Tags:News

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