धनबाद(DHANBAD): धनबाद में शिक्षा का हाल देखिए शिक्षा मंत्री जी. आप तो बगल के जिले के हैं ,इसलिए भी धनबाद पर आपका विशेष ध्यान होना चाहिए. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था से खिन्न लोगों की जुवानी है. दरअसल, मामला यह है कि धनबाद में स्कूली बच्चे पढ़ाने के लिए शिक्षक मांगने जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय पहुंच रहे हैं. सुनकर कानों पर भरोसा नहीं होता लेकिन गुरुवार को धनबाद में हुआ कुछ ऐसा ही है. राजकीय बुनियादी विद्यालय ,खरनी के 2 दर्जन से अधिक छात्र हाथों में आवेदन लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय पहुंचे थे.
पहले स्कूल में थे दो टीचर ,अब है केवल एक
उनका कहना था कि हमारे स्कूल में एक सहायक शिक्षक और एक प्रतिनियोजित शिक्षक कार्यरत थे. 20 सितंबर को प्रतिनियोजित शिक्षक का प्रतिनियोजन समाप्त कर दिया गया. स्कूल में एक ही शिक्षक बचे हैं और स्कूल में 130 बच्चे पढ़ते हैं. ऐसे में 130 बच्चों पर एक शिक्षक का होना अपने आप में व्यवस्था को मुंह चिढ़ाने के लिए कम नहीं है. उनकी मांग थी कि स्कूल में शिक्षक की प्रतिनियुक्ति की जाए, बच्चों के साथ उनके गार्जियन भी थे. उनका कहना था कि वह आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा सके. ऐसे में बुनियादी विद्यालय खरनी ही एकमात्र विकल्प है. बच्चे काफी देर तक कार्यालय में रहे अधिकारी से मिलकर अपनी पीड़ा बताना चाह रहे थे लेकिन अधिकारी संभवत रांची में थे.
बच्चों को आश्वासन तो मिला है ,लेकिन पूरा होगा की नहीं
बच्चों को आश्वासन दिया गया कि रांची से लौटने के बाद उनके आवेदन को जिला शिक्षा अधीक्षक के पास उपस्थापित कर दिया जाएगा और स्कूल में शिक्षक की प्रतिनियुक्ति करने की कोशिश की जाएगी. आपको बता दें कि धनबाद में पहली से आठवीं तक सरकारी स्कूल की संख्या 1727 है जबकि हाई स्कूल 118 है. पहली से आठवीं तक सरकारी शिक्षकों की संख्या 3601 है जबकि सहायक शिक्षक 2575 कार्यरत हैं. सूत्र बताते हैं कि विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की संख्या मानक से बहुत ही कम है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है.
