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सत्याग्रह आंदोलन VS जनाक्रोश  यात्रा: आखिर क्यों जगी "पेपरटाइगर" बनी धनबाद भाजपा, पढ़िए विश्लेषण  

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 2:49:03 PM

धनबाद(DHANBAD):  सत्याग्रह आंदोलन  का जवाब दो तारीख की जनाक्रोश  यात्रा तो नहीं? क्या वजह है कि धनबाद की सुरक्षा के मुद्दे पर अबतक "पेपरटाइगर" बनी भाजपा जग गई है ?कृष्णा अग्रवाल के  सत्याग्रह  आंदोलन का यह जवाब तो नहीं ?ऐसे और कई सवाल है जो विधायक राज सिन्हा की पीसी के बाद धनबाद की हवा में तैर रहे है.  30 तारीख से  भाजपा से इस्तीफा दिए मारवाड़ी महासभा के जिला अध्यक्ष कृष्णा  अग्रवाल धनबाद की सुरक्षा के लिए अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करेंगे तो 2 दिसंबर को भाजपा विधायक राज सिंह के नेतृत्व में जन आक्रोश यात्रा निकालेगी.   यात्रा की घोषणा शनिवार को विधायक राज सिंह ने  की. जिस समय उन्होंने घोषणा की, उस समय धनबाद महानगर के पदाधिकारी मौजूद थे. 

जिला पदाधिकारी भी थे मौजूद 
 
महानगर के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह भी थे. उन्होंने इशारों -इशारों में  बहुत कुछ कह डाला. जिसका मतलब सत्याग्रह कार्यक्रम से जोड़ा जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने कर्तव्यों और अपनी जिम्मेवारियों को बखूबी समझती है और समय-समय पर ऐसा दृष्टिगोचर भी करा चुकी है. कहीं इसका मतलब यह तो नहीं कि उन्होंने कृष्णा  अग्रवाल को इशारों- इशारों में जवाब दिया है.  कृष्णा अग्रवाल का कहना है कि भाजपा में प्रतिनिधित्व करने वाले लोग अपनी जिम्मेवारियों से विमुख हो रहे है.  रंगदारी के खिलाफ उनका विरोध सिर्फ बयान देने तक ही रह गया है.  जिस तेवर और संघर्ष की अपेक्षा विपक्षी राजनीतिक दल ,खासकर भाजपा से लोगों को थी, वह केवल प्रतीकात्मक विरोध तक ही सीमित कर रह गया है.  आज विधायक राज सिंह से जब यह पूछा गया कि कृष्णा अग्रवाल ने तो रंगदारी के खिलाफ धनबाद भाजपा की  नरम तेवर की वजह से ही इस्तीफा दिया है, तो उन्होंने कहा कि इस्तीफा क्यों दिया, किसको दिया, इसकी उनको  जानकारी नहीं है.

सड़क से लेकर सदन तक दिखेगी भाजपा 

अब भाजपा सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी.  2 दिसंबर को जान आक्रोश  यात्रा निकाली जाएगी, उसके बाद इस आंदोलन  को रांची तक ले जाया जाएगा. राज भवन तक वह जाएंगे. जरूरत पड़ी तो सांसद के नेतृत्व में केंद्रीय गृह मंत्री से भी मिलेंगे. मतलब भाजपा अब जाकर जगी है. इधर, सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि रंगदारी के खिलाफ कारोबारी आंदोलन क्यों करें, वह भाजपा के वोटर रहे है. सुरक्षा देना भाजपा की जिम्मेवारी है. लेकिन उनके पक्ष में जिस तरह भाजपा को खड़ा होना चाहिए, पार्टी कहीं खड़ी दिखती नहीं है. कृष्णा अग्रवाल ने भी इन्हीं सब मुद्दों को लेकर भाजपा से इस्तीफा दिया था. उनका कहना था कि डरे करोबारियो  के प्रश्न का उत्तर उनके पास नहीं है. वह भाजपा में रहकर खुद को असहाय महसूस कर रहे थे.  ऐसे में पार्टी से अलग होना ही बेहतर लगा और वह अलग हो गए.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:dhanbadbjprajsinhakrishanaagrawaalghoshana

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