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सारंडा वन बना हाथियों का कब्रिस्तान, एक साल में 6 की गई जान

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 15, 2026, 2:38:37 PM

चाईबासा (CHAIBASA): सारंडा के जंगल में आईईडी विस्फोट में घायल हाथी की 10वे दिन मौत हो गई. 4 मई को हाथी पश्चिमी सिंहभूम जिले के जराइकेला थाना क्षेत्र के कोलबोंगा गांव के पास अंकुआ कंपार्टमेंट संख्या-48 के जंगल में घायल अवस्था में मिला था. मछली पकड़ने गए ग्रामीणों की नजर घायल हाथी पर पड़ी थी. वन विभाग जंगल में ही घायल हाथी का इलाज कर रहा रहा. इसी बीच संक्रमण ज्यादा फैलने के कारण हाथी को मौत हो गई. पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया. बताया जा रहा है कि हाथी चिरिया ओपी थाना क्षेत्र के पोंगा जंक्शन के पास जंगल में आईईडी ब्लास्ट में घायल हुआ था. हाथी करीब 10 साल का था. उसके आगे के दाहिने पैर में गहरा जख्म हुआ था. वह ठीक से चल-फिर नहीं पा रहा था.

एक साल में 6 हाथी मरे
सारंडा वन अब हाथियों के लिए सुरक्षित आश्रय नहीं, बल्कि खतरनाक इलाका बनता जा रहा है. पिछले एक वर्ष में आईईडी विस्फोट की घटनाओं में यहां छह हाथियों की मौत हो चुकी है. यह वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.सबसे पहली घटना 5 जुलाई को हुई, जब तिरिलपोसी गांव के पास जंगल में एक हाथी की मौत हुई. इसके बाद 9 जुलाई को उसी क्षेत्र में दूसरे हाथी की जान चली गई. तिरिलपोसी के नजदीकी जंगल में ही 27 जुलाई को तीसरे हाथी का कंकाल बरामद किया गया. इसके बाद 12 अक्टूबर को गिन्दुंग गांव के पास जंगल में चौथे हाथी की मौत दर्ज की गई। वहीं इस वर्ष जनवरी में जराइकेला थाना क्षेत्र के फुलवारी गांव के जंगल में एक घायल हाथी मिला था. उसका इलाज चल रहा था, लेकिन अंततः 15 अप्रैल को राउरकेला डिवीजन के अंतर्गत कुंवारमुंडा क्षेत्र में उसकी मौत हो गई. अब एक और हाथी की मौत हुई है. लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि सारंडा के जंगल में आईईडी विस्फोट न केवल सुरक्षा बलों के लिए, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं.

इलाज के अभाव में मर रहे हाथी
आईईडी विस्फोट की घटना में घायल हाथियों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है. सही इलाज नहीं मिलने का कारण घायल हाथी लगातार मर रहे है. हाल ही में डिमना लेक से सटे  कुटिमहुली में राज्य का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर खुला है, इसके बाद भी हाथियों के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है. यह करीब 7 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. करीब एक करोड़ की लगत से इसका निर्माण हुआ है.

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