धनबाद(DHANBAD): धनबाद का चर्चित सिंह मेंशन एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है. जेल से छूटने के बाद संजीव सिंह के रूप में सिंह मेंशन को एक बड़ी ताकत भी मिल गई है. विधायक रागिनी सिंह को भी अब मदद मिल रही है. वैसे, जेल से छूटने के बाद संजीव सिंह आक्रामक मुद्रा में दिख रहे है. इसका उदाहरण लोदना आउटसोर्सिंग विवाद में दिखा। उन्होंने दो टूक कह दिया कि आउटसोर्सिंग कंपनी के मालिकों से रिश्तेदारी गांव में चलेगी, झरिया के लोगों को परेशान कर धनबाद में राजनीति करने नहीं देंगे. हालांकि ,इसका मतलब निगम चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा था. इधर, सिंह मेंशन धनबाद से लेकर जमशेदपुर तक सक्रिय हो गया है.
जमशेदपुर में सिंह मेंशन की धमक से एक नई राजनीति की शुरुआत
जमशेदपुर में सिंह मेंशन की धमक से एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत हुई है. सूर्य देव सिंह की बेटी ज्योति सिंह अब जमशेदपुर में सक्रिय राजनीति में कूद गई हैं. वह जमशेदपुर के मानगो नगर निगम से मेयर पद का चुनाव लड़ने जा रही है. बता दें कि मानगो नगर निगम का पहली बार चुनाव होने जा रहा है. ऐसे में सिंह मेंशन के परिवारजन जमशेदपुर जाकर उनका हौसला भी बढ़ाया और उनकी राजनीतिक जमीन को तैयार करने की कोशिश भी की. यह अलग बात है कि सूर्यदेव बाबू के परिवार की लंबी राजनीतिक विरासत है. वह 1977 में अभिवाजित बिहार में झरिया से विधायक बनकर राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी. जिस समय जनता पार्टी का गठन हुआ था, उस वक्त पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के आशीर्वाद से सूर्यदेव सिंह झरिया विधानसभा से चुनाव लड़े और जीते। धीरे-धीरे उनका प्रभाव बढ़ता गया. उनके भाई विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश के बेरिया से विधायक रहे.
दूसरे भाई बच्चा सिंह झरिया से विधायक बने और झारखंड सरकार में मंत्री रहे
दूसरे भाई बच्चा सिंह झरिया से विधायक बने और झारखंड सरकार में मंत्री बने. एक भाई रामाधीर सिंह बलिया जिला परिषद के अध्यक्ष रहे. फिलहाल वह जेल में है. सूर्यदेव सिंह की पत्नी कुंती सिंह भाजपा के टिकट पर दो बार झरिया से विधायक चुनी गई. पुत्र संजीव सिंह भी झरिया से विधायक रहे. फिलहाल संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह झरिया से विधायक है. संजीव सिंह के भाई सिद्धार्थ गौतम भी सक्रिय राजनीति में हैं. और फिलहाल मजदूर संगठन से जुड़े हुए हैं. वह धनबाद लोकसभा से चुनाव भी लड़ चुके हैं. संजीव सिंह के जेल जाने के बाद सिंह मेंशन परेशानियों से घिर गया था, लेकिन रागिनी सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और घर की चौखट से निकलकर झरिया पहुंच गई. वह भाजपा की राजनीति शुरू की. परिणाम हुआ कि विधानसभा चुनाव में वह झरिया से विधायक चुन ली गई.
संजीव सिंह के जेल से बाहर आने के बाद बढ़ गई है राजनीतिक सक्रियता
इधर, एक बार फिर संजीव सिंह के जेल से बाहर के आने के बाद सिंह मेंशन अपनी राजनीतिक विरासत को और बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दिया है. यह अलग बात है कि सूर्यदेव सिंह स्थापित जनता मजदूर संघ उनके निधन के बाद दो भागों में बट गया. जनता मजदूर संघ (कुंती गुट ) और जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट ) बन गया. सूर्यदेव सिंह के एक भाई राजन सिंह के पुत्र नीरज सिंह भी राजनीति में आये. वह बहुत तेजी से राजनीति में अपना कद बढ़ा रहे थे, लेकिन उनकी हत्या हो गई. नीरज सिंह के एक भाई एकलव्य सिंह धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर रह चुके है. नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह झरिया से विधायक रह चुकी हैं. फिलहाल वह राजनीति में सक्रिय हैं और कांग्रेस की राजनीति करती हैं. इधर, रामधीर सिंह की पत्नी इंदु देवी और उनकी बहू आसनी सिंह भी राजनीति में सक्रिय हैं. इंदु देवी धनबाद नगर निगम की पहली मेयर चुनी गई थी. इस बार फिर वह मेयर से चुनाव लड़ने का दवा ठोक दिया है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
