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दुमका में बालू माफिया का राज, सिस्टम बेनकाब, स्कूली छात्रा की मौत का कौन जिम्मेदार!

दुमका में बालू माफिया का राज, सिस्टम बेनकाब, स्कूली छात्रा की मौत का कौन जिम्मेदार!

दुमका (DUMKA) : दुमका जिला के मुफस्सिल थाना के धोबना गांव के पास अनियंत्रित ट्रैक्टर ने साइकिल सवार छात्रा को कुचल दिया. इस घटना में 10वीं की छात्रा आरती कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद चालक ट्रैक्टर छोड़ कर फरार हो गया. आक्रोशित छात्रों ने सड़क जाम कर दिया. छात्र शासन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे है. समाचार प्रेषित किए जाने तक छात्र सड़क पर बैठे हुए है.

सवाल यह नहीं कि बच्ची कैसे मरी, सवाल यह है कि उसे मारने की छूट किसने दी?

झारखंड की उपराजधानी दुमका में भी बालू उठाव पर रोक है लेकिन यह रोक कागजों में सिमट कर रह गया है. ज़मीनी स्तर पर बालू माफिया का खुलेआम राज चलता है. मंगलवार की सुबह आरती घर से निकली थी स्कूल के लिए लेकिन रस्ते में अवैध बालू से लदे ट्रैक्टर ने उसे कुचल दिया. सवाल यह नहीं कि बच्ची कैसे मरी, सवाल यह है कि उसे मारने की छूट किसने दी?

मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के धोबन की है घटना

धोबना के पास सितपहाड़ी गांव की रहने वाली 10वीं की छात्रा आरती साइकिल से स्कूल जा रही थी. तभी अवैध बालू लदा ट्रैक्टर उसे रौंद दिया. घटना में आरती की मौके पर ही मौत हो गई. लेकिन यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि इसे सिस्टम द्वारा रची गई मौत कही जा सकती है.

ग्रामीणों का आरोप-बालू के अवैध परिवहन पर कब लगेगा रोक

ग्रामीणों का आरोप है कि यही ट्रैक्टर पहले भी कई लोगों को घायल कर चुका है, लेकिन कार्रवाई शून्य रही. वजह साफ़ है बालू माफिया और प्रशासन की साठगांठ. आंदोलनरत छात्रा का कहना है कि अगर स्कूल जाते बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर पुलिस और प्रशासन किसलिए है? एक छात्र का आरोप है कि अवैध बालू का परिवहन धड़ल्ले से हो रहा है, सब जानते हैं, लेकिन जानबूझकर कोई नहीं रोकता.

जाम समाप्त कराने में प्रशासन के छूट रहे पसीने

हैरानी की बात यह है कि सुबह 8 बजे हुई घटना के कई घंटे बाद तक कोई वरीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे. मुफस्सिल थाना की पुलिस पहुंची लेकिन सिर्फ औपचारिकता निभाने. फिलहाल सदर अंचलाधिकारी अमर कुमार घटना स्थल पर पहुंचे है. लोगों को समझाने का प्रयास जारी है.

ग्रामीणों ने शव को उठाने से रोका, वरीय पदाधिकारी को बुलाने की मांग

गुस्साए ग्रामीणों ने शव उठाने से इनकार कर दिया और साफ़ कहा कि जब तक ज़िम्मेदार अफसर नहीं आएंगे, आंदोलन जारी रहेगा. लोगों की यह नाराज़गी सिर्फ एक मौत की नहीं है बल्कि यह नाराज़गी वर्षों से चल रहे अवैध बालू के आतंक की है.

जनता का सवाल : अगर कानून सिर्फ कागज़ों में है, तो बच्चों की जान की कीमत क्या है?

दुमका में अवैध बालू अब सिर्फ अवैध कारोबार नहीं बल्कि मौत का उद्योग बन चुका है. जब रोक के बावजूद बालू निकल रहा है, तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किस अफसर की मिलीभगत है? कौन बालू माफिया को संरक्षण दे रहा है. आज एक स्कूली बच्ची मरी है. कल कोई और मरेगा, अगर यही सिस्टम चलता रहा. धोबना गांव की जनता एक ही सवाल पूछ रही है कि अगर कानून सिर्फ कागज़ों में है, तो बच्चों की जान की कीमत क्या है?

रिपोर्ट-पंचम झा

Published at:16 Dec 2025 08:55 AM (IST)
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