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सम्मेद शिखरजी विवाद: पर्यटनस्थल घोषित करने पर सियासी घमासान तेज, झामुमो ने रघुवर सरकार को ठहराया जिम्मेवार तो बीजेपी ने हेमंत सरकार पर बोला हमला

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:14:19 PM

रांची(RANCHI): झारखंड में जैन समाज के पवित्र तीर्थस्थल सम्मेद शिखर जी महाराज को पर्यटन स्थल घोषित करने का विवाद गहराता चला जा रहा है.लगातार लोग सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस विरोध के साथ मामले को लेकर सियासी घमासान भी शुरू हो गया है. बीजेपी जहां इस मुद्दे को लेकर राज्यसरकार पर हमलावर है. तो वहीँ झामुमो इस विवाद की जड़ पूर्व की रघुवर सरकार को मान रही है. इस पूरे मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है.    

सीएम हेमंत ने ये कहा  

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि भारत सरकार के द्वारा जो गैजेट प्रकाशित हुआ है, उसी के कारण आज ये विषय खड़ा है. राज्य सरकार ने इस मामले में ना कोई अभी तक टीका टिप्पणी की है और ना ही कोई निर्णय लिया है. अब ये किस संदर्भ में लिया गया है और क्यों लिया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी लेनी होगी, इसके बाद ही हम कुछ बता पाएंगे. हमारा सभी धर्म और समाज के प्रति सम्मान है, उनके सवालों के क्या हल हो सकते हैं, ये हम जरूर देखेंगे.

झामुमो ने बीजेपी से मांगा जवाब

बता दें कि सीएम ने भले ही इस मामले पर खुल के कुछ नहीं कहा है. लेकिन उनकी पार्टी के नेता जरूर इस मुद्दे पर बयान दे रहे हैं. बीते दिन झामुमो की ओर से प्रेस वार्ता कर सुप्रियो भट्टाचार्य ने इस विवाद के लिए बीजेपी को दोषी माना है. उन्होंने कहा कि झारखंड की किरकिरी सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करने के बाद हो रही है. देश भर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं और इसमें भाजपा राज्य सरकार पर सवाल उठा रही है. लेकिन इसका जिम्मेवार ही भाजपा है, पारस नाथ सम्मेद शिखरजी को 2018 में भाजपा सरकार ने पर्यटन स्थल बनाने का प्रस्ताव भेजा था. जिसके बाद 2019 में भाजपा सरकार ने एक गजट लाया जिसमें राज्य के सभी जिलों के पर्यटन स्थल की सूची भेजी गई. उस समय किसकी सरकार थी इसका जवाब बाबूलाल और दीपक प्रकाश देंगे?

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार 2019 के दिसंबर से आई है और इन तीन वर्षों में हमने वहां एक भी छेड़छाड़ नहीं किया है. हम जैन धर्म समाज के लोगों का सम्मान करते है. 20 दिसंबर को भी जब जैन समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी उस वक्त भी मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि हम किसी भी हालत में पारसनाथ को अपवित्र नहीं करने देंगे. उन्होंने कहा कि दिल्ली, सूरत, मुंबई और रांची में रैली निकाली जाती है. यह सब भाजपा का षडयंत्र है. दिल्ली में रैली निकाली गई क्यों नहीं गृह मंत्री ने जवाब दिया. गुजरात में हजारों लोग रैली में शामिल होते है. इसमें भाजपा के नेताओं का मुंह बंद क्यों है. जिस धर्म में मांस, मदिरा पूरी तरह से वर्जित है, उस समाज के सबसे बड़े तीर्थ स्थल को अपवित्र करने की कोशिश की जा रही है.

बीजेपी ने सरकार पर किया पलटवार

वहीं इसके बाद बीजेपी नेता अमर बाउरी ने भी राज्य सरकार पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पर्यटन नीति 2021 को स्वीकृति देते हुए 28 दिसंबर 2021 को इसे पर्यटन क्षेत्र में शामिल करने का एक संकल्प जारी किया. उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री का आरोप है कि ये विवाद पूर्व की रघुवर सरकार के द्वारा किया गया है. मगर, उन्होंने कहा कि ये विवाद रघुवर सरकार ने नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार ने 2022 में इस तीर्थस्थल को पर्यटनस्थल में शामिल कर खड़ा किया है. उन्होंने राज्य सरकार से इसे वापस लेने का आग्रह किया है.  

जानिए क्या है विवाद की वजह

बता दें कि कुछ दिनों पहले सम्मेद शिखर के आसपास का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कुछ युवक शराब पीते हुए मस्ती करते नजर आ रहे थे. इसके बाद से ही जैन धर्मावलंबियों का विरोध और मामले को लेकर विवाद शुरू हो गया था. मालूम हो कि सम्मेद शिखर के आसपास के इलाके में मांस-मदिरा की खरीदी-बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है. बावजूद इसके सम्मेद शिखर के आस पास कुछ दिन पहले शराब पीते युवक का वीडियो वायरल हुआ था. धर्मस्थल से जुड़े लोगों का मानना है कि पर्यटन स्थल घोषित होने के बाद से जैन धर्म का पालन नहीं करने वाले लोगों की भीड़ यहां बढ़ी. यहां मांस-मदिरा का सेवन करने वाले लोग आने लगे.

पवित्र तीर्थ है सम्मेद शिखर

बता दें सम्मेद शिखर जैनियों के लिए एक पवित्र धार्मिक स्थल है. जैन इसे पवित्र कैलाश की तरह ही मानते हैं  एवं स्थान पर जैनियों का पवित्र तीर्थ शिखरजी स्थापित है. सबसे अहम बात  इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24  में से 20  तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की. इसी सम्मेद शिखर पर  23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था. जो की जनियों के भगवान संत माने जाते हैं. इस शिखर को लेकर जैनियों मे पार श्रद्धा है इसलिए इस  पवित्र पर्वत के शिखर तक श्रद्धालु पैदल या डोली से जाते हैं. प्रकृति के सुंदर नजरों के बीच जंगलों,  पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए नौ किलोमीटर की यात्रा तय कर के भक्त शिखर पर पहुंचते हैं. बता दें 2019  में केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखर को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया था. इसके बाद झारखंड सरकार ने एक संकल्प जारी कर जिला प्रशासन की अनुशंसा पर इसे पर्यटन स्थल घोषित किया.

जबतक लिखित कार्रवाई नहीं, जारी रहेगा आंदोलन

इधर आंदोलन करने वाले जैन श्रद्धालु अपनी मांग पर अड़े हुए है उनकी मांग है की केंद्र सरकार तत्काल सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र से मुक्त करें जब तक ऐसा नहीं होगा आंदोलन जारी रहेगा. जब तक केन्द्र सरकार अपना नोटिफिकेशन बापिस नहीं लेती है. तब तक यह आंदोलन बापिस नहीं लिया जाना चाहिये. तो वहीं विश्व जैन संगठन का कहना है कि श्री सम्मेद शिखर जी के संरक्षण हेतु जारी विश्वव्यापी ‘श्री सम्मेद शिखर जी बचाओ आंदोलन’ की प्रमुख मांगो को केंद्र सरकार और झारखण्ड सरकार द्वारा संशोधन किये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है लेकिन लिखित कार्यवाही होने तक आंदोलन जारी रहेगा

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