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कोर्ट में बुर्के पर बवाल, हिजाब पहन के जाने से अधिवक्ता को रोका, कोर्ट ने कहा-पहले बताएं पहचान

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 3:09:59 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : देश में बुर्का पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अभी कॉलेजों में बुर्का विवाद थमा नहीं था कि एक बार फिर से ये चर्चा में आ गया है. हालांकि इस बार अदालत में ही बुर्के पर बवाल हो गया है. दरअसल जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और लद्दाख हाई कोर्ट (Ladakh High Court) की श्रीनगर बेंच (Srinagar Bench) में एक महिला वकील जब बुर्का पहनकर एक केस की पैरवी (Lobbying) करने पहुंची तो हाई कोर्ट (High Court) ने इस पर आपत्ति जताई. साथ ही महिला वकील से अपनी पहचान बताने को कहा. महिला वकील (Female lawyer) से कहा गया कि वह अपने चेहरे से बुर्का हटा ले, लेकिन महिला वकील ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. साथ ही ये भी कहा कि इस तरह की पोशाक पहनकर कोर्ट (Court) में आना उसका मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) है.

महिला वकील के रवैये पर कोर्ट ने डिसिप्लिन बनाए रखने को कहा

वहीं इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने महिला वकीलों से कोर्ट रूम में डिसिप्लिन (Discipline) और पेशेवर पहचान बनाए रखने को कहा. महिला वकील के इस रुख पर हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General) से वकीलों के लिए ड्रेस कोड से जुड़े कानून और नियमों पर स्पष्टता मांगी. जिसमें पाया गया कि वकीलों के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India BCI) के नियम इस तरह के परिधान की अनुमति नहीं देते हैं.

जानें क्या है पूरा मामला

नाजिया इकबाल के साथ उनके पति मोहम्मद यासीन खान की तलाशी का मामला हाईकोर्ट की श्रीनगर बेंच में चल रहा है. मामला 27 नवंबर 2024 का है. इस तारीख को जस्टिस मोक्ष खजूरिया और जस्टिस राहुल भारती की डिवीजन बेंच (Division Bench) में सुनवाई होनी थी. जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो नाजिया की ओर से एक महिला वकील (Female lawyer) पेश हुई. उसने बुर्का पहना हुआ था. इस पर डिवीजन बेंच ने महिला वकील की पहचान के लिए उसे बुर्का (Burqa) हटाने को कहा.

इस पर महिला वकील ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. साथ ही कहा कि भारतीय संविधान (Indian Constitution) के तहत उसे इस तरह की पोशाक पहनने का अधिकार है. इस पर बेंच ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल से वकीलों की पोशाक को लेकर बीसीआई (BCI) द्वारा बनाए गए नियमों पर रिपोर्ट (Report) मांगी.

चेहरा ढककर कोर्ट आना नियमों के खिलाफ

रजिस्ट्रार न्यायिक ने 5 दिसंबर 2024 को नियम और कानून को लेकर एक रिपोर्ट पेश की. इसमें महिला वकीलों के ड्रेस कोड (Dress Code) के बारे में विस्तार से बताया गया. रिपोर्ट (Report) में साफ है कि बीसीआई (BCI) द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड में कहीं भी महिला वकीलों के चेहरा ढककर कोर्ट (Court) आने का जिक्र नहीं है. इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट (High Court) ने स्पष्ट किया कि महिला वकीलों का चेहरा ढककर कोर्ट आना बीसीआई (BCI) के नियमों के खिलाफ है. वकीलों के लिए बीसीआई के नियम इस तरह के परिधान की इजाजत नहीं देते. इसलिए महिला वकीलों को कोर्ट रूम (Courtroom) में शिष्टाचार और पेशेवर पहचान बनाए रखनी चाहिए.

जानिए क्या है महिला वकीलों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड

  • बाहरी कपड़ों के लिए महिलाओं को सफ़ेद कॉलर वाली पूरी आस्तीन वाली काली जैकेट या ब्लाउज़ पहनना ज़रूरी है. सफ़ेद बैंड और एडवोकेट गाउन पहनना भी अनिवार्य है. वैकल्पिक रूप से, कॉलर के साथ या बिना कॉलर वाला सफ़ेद ब्लाउज़ और सफ़ेद बैंड वाला काला खुला कोट भी पहनने की अनुमति है.
  • निचले परिधानों के लिए महिलाएं सफ़ेद, काले या किसी भी हल्के रंग की साड़ी या लंबी स्कर्ट चुन सकती हैं, बशर्ते कि वे प्रिंट या डिज़ाइन के बिना हों. अन्य विकल्पों में सफ़ेद, काले धारीदार या भूरे रंग के फ्लेयर्ड ट्राउज़र, चूड़ीदार-कुर्ता, सलवार-कुर्ता या पंजाबी ड्रेस शामिल हैं. इसे सफ़ेद या काले दुपट्टे के साथ या उसके बिना पहना जा सकता है.
  • पारंपरिक पोशाक को काले कोट और बैंड के साथ पहनने पर भी स्वीकार्य है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में पेश होने के अलावा वकील का गाउन पहनना वैकल्पिक है. साथ ही, गर्मी के महीनों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में पेश होने के अलावा काला कोट पहनना अनिवार्य नहीं है.
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