जामताड़ा(JAMTARA): जिले में निर्माणाधीन डायवर्सन पुल को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. दक्षिणबहाल जोरिया पर बन रहे इस पुल की एप्रोच रोड में दरार और टूट-फूट सामने आने के बाद गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. मामले में जिला उपायुक्त आलोक कुमार ने पथ निर्माण विभाग को तत्काल जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से जामताड़ा-दक्षिणबहाल मुख्य सड़क पर यह डायवर्सन पुल और लगभग 700 मीटर लंबी एप्रोच सड़क का निर्माण किया जा रहा है. लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क के लगभग एक मीटर हिस्से में दरारें और टूट-फूट सामने आने से पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
खबर सामने आने के बाद विभाग सक्रिय हुआ और मजदूर लगाकर टूटे हुए पीसीसी सड़क के हिस्से को हटाया गया. इसके बाद वहां ग्रेनुलर सब बेस (GSB) की परत बिछाई गई, जिससे स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं खामियों को ढकने की कोशिश तो नहीं की जा रही है. GSB आमतौर पर सड़क की नींव के रूप में उपयोग की जाने वाली परत होती है, जिसमें गिट्टी, पत्थर के छोटे टुकड़े और स्टोन डस्ट शामिल होते हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वास्तविक समस्या को सुधारने के बजाय केवल लीपापोती की जा रही है. उनका कहना है कि निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है और सड़क बनने के तुरंत बाद ही उसमें दरारें आना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है.
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि ग्रामीणों के दबाव में वहां पीसीसी सड़क बनाई गई थी, जबकि मूल योजना में ब्लैकटॉप सड़क का प्रावधान था. हालांकि यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण मानकों के अनुसार हुआ था, तो इतनी जल्दी सड़क में टूट-फूट कैसे हो गई.
सबसे हैरानी की बात यह रही कि सड़क की खराब स्थिति की जानकारी तब सामने आई जब मीडिया ने विभाग से सवाल किए. इससे पहले तक निगरानी कर रहे अभियंताओं को भी इस समस्या की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी. अब स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री तथा तकनीकी मानकों की गहन समीक्षा की मांग उठाई है.