टीएनपी डेस्क(TNP DESK):भले ही उत्तराखंड के देहरादून में हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा की हत्या कर दी गई है लेकिन विक्रम शर्मा से ज्यादा इन दिनों अखिलेश सिंह के नाम की चर्चा जोरों पर है.हो भी क्यों ना विक्रम शर्मा केवल अपना दिमाग लगाता था लेकिन किसी भी हत्याकांड को अंजाम देने के लिए अखिलेश सिंह की ताकत की जरूरत पड़ती थी, अखिलेश सिंह फौलादी शरीर और उग्र मिजाज़ रखने वाला नौजवान था.वही दूसरी तरफ विक्रम शर्मा शांत स्वभाव किसी भी योजना को बारिकी से बनाने वाला था.विक्रम शर्मा और अखिलेश सिंह की इस ख़तरनाक जोड़ी ने जमशेदपुर में अपराध का एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया जिससे पूरा शहर थरथर कांपता था.
करोबारीयों और अधिकारियों को बनाया निशाना
विक्रम शर्मा वैसे करोबारीयों और अधिकारियों को अपना निशाना बनाता था जो मोटी रकम उगल सकते थे.जो उसकी बात नहीं मानता, अखिलेश सिंह को बस इशारा करने भर वह उसे ख़तम कर देता था.अखिलेश सिंह पढ़े लिखे परिवार का एक ऐसा नौजवान था जिसके पिता खुद पुलिस विभाग में था.लेकिन पढ़ें- लिखे होने के बावजूद पिता के पुलिस में होने के बावजूद भी अखिलेश सिंह पर इन सब चीजों का कोई असर नहीं पड़ा.उसको बस विक्रम शर्मा और उसकी बातें ही समझ आती थी.
जेल में बंद होने के बावजूद दोनों की जोड़ी नहीं टूटी
सूत्र बताते हैं कि भले ही विक्रम शर्मा ने जमशेदपुर छोड़ दिया था और उत्तराखंड के देहरादून में नाम बदल कर रहा था लेकिन जेल में होने के बावजूद भी अखिलेश सिंह अपने गुंडों से हर वह काम करवाता था जिसकी ओर विक्रम शर्मा इशारा करता था.शहर छोड़ने और जेल में बंद होने के बावजूद दोनों की जोड़ी नहीं टूटी और शातिर दिमाग के साथ फौलादी जिगरा से दोनों पैसा छापते रहे.
विक्रम शर्मा के नाम पर कई करोड़ो की अथाह संपत्ति
सूत्र बताते हैं कि विक्रम शर्मा के नाम पर कई करोड़ो की अथाह संपत्ति है जो उसने काली कमाई करके अर्जित की है.विक्रम शर्मा और अखिलेश सिंह की जोड़ी तब सुर्खियों में आई थी जब ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा हत्याकांड हुआ था.साल 1998 में पहली बार विक्रम शर्मा पर अपराधिक मामला थाने में दर्ज करवाया गया था.वही इसके बाद एक के बाद एक फायरिंग हत्याकांड दोनों द्वारा किया गया जो आज भी लोग भूल नहीं पाये है.
इस तरह बनी गुरु शिष्य की जोड़ी
जानकार बताते है कि विक्रम शर्मा जब मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग बच्चों को देता था तब अखिलेश सिंह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने विक्रम शर्मा के पास जाता था दोनों के बीच बॉन्डिंग इतनी अच्छी बनी कि अखिलेश सिंह विक्रम शर्मा को अपना गुरु मानने लगा फिर क्या धीरे-धीरे उन दोनों की जोड़ी अपराध की दुनिया में जम गई.जानकर बताते है कि भले ही अखिलेश सिंह के ऊपर 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हो लेकिन इसको करवाने के पीछे विक्रम शर्मा का ही हाथ था.विक्रम सिंह कुछ भी करने के लिए इशारा करें और अखिलेश सीने से पूरा ना करें ऐसा कभी नहीं होता था.
नाम सुनते ही पसीना छूट जाता था करोबारी और अधिकारियों का
विक्रम शर्मा का स्वभाव और मीठी बोली तो वही दूसरी तरफ अखिलेश सिंह का आक्रामक स्वभाव और फौलादी शरीर ने जमशेदपुर में ऐसा तांडव मचाया कि लोग सहमे हुए रहने लगे.अखिलेश सिंह का नाम सुनते ही जमशेदपुर के बड़े से बड़े करोबारी और अधिकारियों का पसीना छूट जाता था.विक्रम शर्मा और अखिलेश सिंह ने भी अधिकारियों से पैसे मांगे, या कुछ करने को कहा,और पूरा नहीं हुआ तो फिर वह अधिकारी कारोबारी समझ लेते थे कि उनकी जान चली जाएगी.