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रावण तो जल गया लेकिन उसके विचार रखने वाले कब होंगे चिन्हित !

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:58:09 AM

धनबाद(DHANBAD) :  धनबाद का बरवड्डा हो, सिंदरी हो, भूली हो या फिर धनबाद शहर. सभी जगहों पर दशहरा के दिन रावण दहन के कार्यक्रम होते हैं. यह कार्यक्रम भी बहुत ही शिद्दत के साथ किए जाते हैं. भीड़ भी काफी जुटती है, लोगों में उत्साह भी खूब रहता है. भीड़ तो इतनी जुटती है कि संभालना पुलिस के लिए कठिन हो जाता है. पहले ये कार्यक्रम जिले में एक-दो जगहों पर ही होता था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है. अहंकार के प्रतीक रावण के पुतला का दहन किया जाता है. हिंदू धर्म में दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत, अंधकार पर रोशनी की जीत का प्रतीक माना जाता है. मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था. उसी दिन से दशहरा मनाया जाता है और रावण का पुतला दहन किया जाता है.

अपने भीतर की बुराइयों को दूर करने की ज़रुरत

रावण का पुतला दहन करने का अभिप्राय होता है कि हर मनुष्य अपने भीतर की बुराइयों को जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, द्वेष, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी को अपने भीतर से निकालकर फेंक दें. जिससे उसका भी भला हो और समाज की भी भलाई हो. बरवड्डा के श्री श्री बड़ाजमुआ पूजा समिति की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रावण दहन का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे वरीय कांग्रेस नेता सह प्रदेश झारखंड पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह और विशिष्ट अतिथि के रूप में एडीएम नंदकिशोर गुप्ता मौजूद थे.

रावण दहन के कार्यक्रम में थे शामिल

स्थानीय मुखिया रामकिशुन विश्वकर्मा, उमा चरण महतो, मुरारी चौधरी, गणेश चौरसिया, गोपाल महतो, गुड्डू सिंह सहित हजारों की संख्या में भक्त रावण दहन के कार्यक्रम में उपस्थित रहे. इसके अलावा भूली में 40 फीट के रावण का और सिंदरी में 60 फीट के रावण का दहन किया गया. यहां भी काफी भीड़ रही. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि रावण एक विचार है और इस विचार को ही खत्म करने की जरूरत है. आज देश पर यही विचार हावी है, सभी को इस विचार का परित्याग करना चाहिए. वही एडीएम नंदकिशोर गुप्ता ने कहा कि आज अंधकार पर प्रकाश का विजय उत्सव है. समाज के रावण को भी चिन्हित कर उनसे दूर रहने की जरूरत है.

रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद

 

 

Tags:News

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