रांची (RANCHI): सरना धर्म कोड लागू करने, आदिवासी जमीन की सुरक्षा और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य के विभिन्न आदिवासी संगठन एक मंच पर आ गए हैं. इन संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए बैठक की और बाद में प्रेसवार्ता कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं. प्रेसवार्ता के दौरान नेताओं ने साफ कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा.
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए गीताश्री उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों और पहचान के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में आदिवासी धर्म की अलग पहचान नहीं दी जा रही है. उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि सभी संस्थाओं और दस्तावेजों में अलग “आदिवासी धर्म कॉलम” लागू किया जाए, ताकि आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके.
गीताश्री उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि आदिवासियों की सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से इस मांग को उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं की गई. वहीं आदिवासी जन परिषद के नेता प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि आदिवासियों का लगातार राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है. चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरना धर्म कोड जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में इस मुद्दे को लेकर इच्छाशक्ति की कमी साफ दिखाई दे रही है.
प्रेसवार्ता में देवकुमार धान ने भी सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लगातार आदिवासी संस्कृति, परंपरा और जमीन पर हमला हो रहा है. बाहरी ताकतें आदिवासी क्षेत्रों में कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आदिवासी संगठन सड़क से लेकर सदन तक बड़ा आंदोलन करेंगे. प्रेसवार्ता में कई सामाजिक और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.