साहिबगंज(SAHIBGUNJ) : झारखंड की राजधानी रांची व उप राजधानी दुमका के साथ-साथ साहिबगंज जिले में भी प्रकृति पूजा के महान पर्व सरहुल की जबरदस्त धूम देखने को मिल रही है. जिले के विभिन्न इलाकों में आदिवासी समाज पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूरे उत्साह और श्रद्धा से इस पर्व को मना रहा है. इसी क्रम में आदिवासी संघर्ष सरना समिति, तालझारी- राजमहल के तत्वावधान में सरहुल पर्व का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम में पारं परिक नृत्य,गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह सरहुलमय बना दिया.
प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है सरहूल
कार्यक्रम का शुभारंभ राजमहल के लोकप्रिय सांसद विजय हांसदा और विधायक एमटी राजा सहित कई गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. इसके बाद दोनों जन प्रतिनिधियों ने मंच से उपस्थित लोगों को सरहुल पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरहुल सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है.
पूरी श्रद्धा के साथ इसे आगे बढ़ा रही है नई पीढ़ी
इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, समाज के प्रतिनिधि और युवा मौजूद रहे. सभी ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य-गान कर इस पर्व को यादगार बना दिया. सरहुल के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आदिवासी संस्कृति और परंपराएं आज भी जीवंत हैं और नई पीढ़ी इसे पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है.
रिपोर्ट – गोविंद ठाकुर