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राजगंज डिग्री कॉलेज विवाद : न जयराम महतो और न मथुरा बाबू की, अब ऐसे काम करेगा यूनिवर्सिटी !

राजगंज डिग्री कॉलेज विवाद : न जयराम महतो और न मथुरा बाबू की, अब ऐसे काम करेगा यूनिवर्सिटी !

धनबाद (DHANBAD) : धनबाद के राजगंज डिग्री कॉलेज के प्राचार्य की कुर्सी दो विधायकों  की अघोषित लड़ाई में "म्यूजिकल चेयर" बन गई थी.   कहने के लिए  तो दोनों विधायक इस मामले में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कह रहे थे, न अभी कुछ कह रहे है. लेकिन अंदर ही अंदर सियासत चल रही थी, आगे भी चलेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है. एक विधायक है डुमरी के जयराम महतो तो दूसरे विधायक हैं टुंडी के विधायक मथुरा महतो. मथुरा महतो शासी निकाय के अध्यक्ष भी है.  दोनों के बीच चल रही शह -मात  के खेल की वजह से कॉलेज के प्राचार्य की कुर्सी ताले में कैद हो गई ही.  एक  महीने से भी अधिक समय से प्राचार्य कक्ष में ताला बंद था. कॉलेज में पढ़ाई का माहौल बिल्कुल लुप्त हो गया था. 
 
कॉलेज परिसर राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया था
 
कॉलेज परिसर राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया था. आखिरकार विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय मैनेजमेंट ने इसमें हस्तक्षेप किया. अब उम्मीद की जा रही है कि माहौल बदलेगा. हालत तो यह  हो गई थी कि कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक कार्य भी ठप  थे.  शिक्षक और कर्मचारी राजनीतिक गुटबाजी में फंसे हुए थे. दो नेताओं के बीच कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर खींचतान चल रही थी.  पंचायत प्रतिनिधियों ने भी मामले को सुलझाने का हर संभव प्रयास किया. लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिली.  विश्वविद्यालय मैनेजमेंट ने तात्कालिक व्यवस्था की है और अतिरिक्त प्रभार में कॉलेज के प्राचार्य के पदस्थापन का निर्णय लिया है. लेकिन नई प्राचार्य के लिए भी कॉलेज का माहौल सुधारना बहुत आसान नहीं होगा.  क्योंकि जब तक राजनीति होगी, कर्मचारी और शिक्षक गुटों  में बंटे  रहेंगे, तब तक स्थिति संभालना बहुत आसान नहीं होगा. 

आखिकार यूनिवर्सिटी को हस्तक्षेप करना ही पड़ा 

बता दें कि राजनीतिक अखाड़ा बना धनबाद के राजगंज कॉलेज के प्राचार्य के मामले में आखिरकार यूनिवर्सिटी को हस्तक्षेप करना ही पड़ा.दो विधायकों के समर्थकों की खींचतान में यह मामला जटिल हो गया था. विश्वविद्यालय ने SSLNT महिला कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर शर्मिला रानी को राजगंज डिग्री कॉलेज के प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है .यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा. यूनिवर्सिटी ने राजगंज कॉलेज में चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है. फैसले के अनुसार डॉक्टर शर्मिला रानी नियमित प्रचार की नियुक्ति तक वहां की अतिरिक्त प्रभार में रहेगी. कॉलेज का शासी निकाय नियमित प्राचार्य के लिए विज्ञापन निकलेगा. नियुक्ति साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी .विश्वविद्यालय ने प्रभारी प्राचार्य को अगले 21 दिनों में राजगंज कॉलेज में शासी निकाय के गठन का निर्देश दिया है.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Published at:05 Jun 2025 06:58 AM (IST)
Tags:DhanbadWiwadCollegePrincipalUniversity
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