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वन विभाग के अनुमति के बिना रेलवे ने काटे सैकड़ों पेड़, सूचना के बाद डीएफओ ने उठाया ये कदम  

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 1:00:26 AM

दुमका(DUMKA):वर्तमान समय मे पर्यावरण प्रदूषण के खतरे से सभी वाकिफ है. तभी तो समय-समय पर पौधारोपण के लिए देशव्यापी अभियान चलाया जाता है. पेड़ की महत्ता को समझते हुए कई संस्थाएं इसके संरक्षण के लिए कार्य कर रही है. इसके बाबजूद दुमका में रेलवे ने अपनी एक परियोजना को शुरू करने के लिए सैकड़ों पेड़ को कटवा दिया. आश्चर्य की बात तो ये है कि रेलवे ने इसके लिए वन विभाग की अनुमति लेना भी उचित नहीं समझा. रात के अंधेरे में पेड़ को काटा गया और वन विभाग को इसकी भनक तक लगी. जब सैकड़ों पेड़ धरासायी हो गये. अब वन विभाग मामले की जांच कर कार्रवाई में जुटी है. और ये सब शहर से सटे कुरुवा गांव के पास हुआ.

रेलवे ने कटवाये सैकड़ों पेड़

पिछले साल दुमका रेलवे स्टेशन परिसर में कोल डंपिंग यार्ड की शुरुवात की गई. पाकुड़ से सड़क मार्ग से कोयला दुमका रेलवे स्टेशन परिसर में डंप किया जाता है. यहां से गुड्स ट्रैन की ओर से अन्य जगह भेजा जाता है. डंपिंग यार्ड शुरू होते ही स्टेशन परिसर और आस-पास के लोग कोयला के धूल-कण से परेशान है. प्रदूषण के खिलाफ लोग चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं. वैसे तो रेलवे आज तक नहीं माना की डंपिंग यार्ड से प्रदूषण भी फैल रहा है. दुमका रेलवे स्टेशन से सटे कुरूवा के के पास हावड़ा रेल डिवीजन की अपनी जमीन है.

वन विभाग के बिना अनुमति ही काटे गये पेड़

एक महीने पहले हावड़ा और आसनसोल के डीआरएम ने स्थल निरीक्षण कर यहां पर कोल डंपिंग के लिए यार्ड बनाने की बात कही थी. उद्देश्य रेलवे स्टेशन और आस-पास के लोगों को प्रदूषण से मुक्ति दिलाना है. या डंपिंग यार्ड का विस्तार करना, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है. लेकिन रेलवे से अनुमति मिलने के बाद कोल डंपिंग करने वाली बीजीआर कंपनी को काम कराने का निर्देश मिला. वन विभाग की अनुमति लिए बगैर ही तीन दिन के अंदर रात के अंधेरे में छोटे बड़े करीब पांच सौ पेड़ पौधे कटवा दिए गए. नियम है कि जमीन किसी की भी हो, लेकिन हरे पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी है. लेकिन यहां रेलवे और कार्यकारी एजेंसी ने वन विभाग को ठेंगा दिखाते हुए पेड़ कटवा दिया.

डीएफओ ने सूचना के बाद जांच शुरु किया

पेड़ काटने की जानकारी जैसे ही डीएफओ को मिली तो पूरी टीम के साथ जांच करने के लिए पहुंच गए. कटे हुए पेड़ों की तस्वीर और वीडियो ग्राफी कराई गयी. जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि रेलवे या कार्यकारी एजेंसी ने वन विभाग से पेड़ काटने की की अनुमति नहीं ली थी. विभाग को जानकारी दिए बगैर कुछ ग्रामीणों की मदद लेकर पेड़ों को कटवा दिया.

रेलवे के परियोजना के तहत काटा गया पेड़

इस बाबत पूछे जाने पर कोल डंपिंग यार्ड का काम करने वाली बीजीआर के साइट इंचार्ज का कहना है, कि यह रेलवे और वन विभाग का मामला है. वहीं वन विभाग के अधिकारी फिलहाल कैमरा के सामने कुछ कहने के लिए तैयार नहीं हो सकता है. जांच पूरी होने के बाद आधिकारिक बयान आये, लेकिन इतना जरूर कहा कि विभाग की अनुमति के बिना करीब पांच सौ पेड़ पौधे काटे गए हैं. इसमें कुछ ग्रामीणों का भी हाथ है. मामले की जांच चल रही है. कोयला कंपनी पर कार्यकारी एजेंसी और रेलवे की भूमिका की जांच चल रही है. दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा.

रिपोर्ट-पंचम झा

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