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रेलवे का मंच बना राजनीतिक मंच, सांसद नलिन सोरेन ने कहा- गरीब लोगों के लिए वंदे भारत उपयोगी नहीं, कारण यहां का पिछड़ापन

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 8:33:15 PM

दुमका(DUMKA): झारखंड की उपराजधानी दुमका अब तक ट्रेन के मामले में पिछड़ी हुई थी. लेकिन आज का दिन न केवल दुमका बल्कि संथाल परगाना प्रमंडल के लिए भी ऐतिहासिक दिन है. प्रमंडल के लोगों को केंद्र सरकार द्वारा वंदे भारत ट्रेन की सौगात दी गई है. भागलपुर-हावड़ा वाया दुमका वंदे भारत ट्रेन का शुभारंभ रविवार को किया गया है. इस बाबत दुमका रेलवे स्टेशन पर रेलवे द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में वक्ता के रूप में दुमका सांसद नलिन सोरेन, गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे, भाजपा नेत्री सीता सोरेन, पूर्व मंत्री डॉ. लुईस मरांडी और जिला परिषद अध्यक्ष जायेस बेसरा मंच पर मौजूद थे. हालांकि, देखते ही देखते रेलवे का यह मंच राजनीतिक मंच में तब्दील हो गया.

राज्य के सीएम से नहीं संभल रहा झारखंड: सीता सोरेन

रेलवे के मंच को राजनीतिक मंच में तब्दील करने की शुरुआत भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने की.  दुमका वासियों को केंद्र सरकार द्वारा वंदे भारत ट्रेन की सौगात मिलने पर उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दिया, जिसके तहत सबका साथ, सबका विकास की बात की जाती है. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि संथाल परगना प्रमंडल जैसे पिछड़े क्षेत्र को भी वंदे भारत ट्रेन की सौगात मिली है. उन्होंने राज्य सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि, साढ़े चार वर्षों तक राज्य सरकार ने झारखंड के लिए क्या किया? अपनी जेब गर्म करते रहे, अपनी झोली भरते रहे. सरकार के मंत्री जेल की यात्रा कर रहे हैं. इसके बावजूद सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. साढ़े चार वर्षों तक जनता को भूल गए और अब नए-नए वादे किये जा रहे हैं. यहां के सीएम से झारखंड संभल नहीं रहा है. इसलिए चाहे असम के सीएम हो या केंद्रीय मंत्री झारखंड में कैंप कर रहे हैं. क्योंकि हमें झारखंड की चिंता है. यहां के लोगों की चिंता हमें है.   झारखंड को लूट कर खोखला करने वालों से झारखंड का विकास संभव नहीं है.

दुमका-दिल्ली ट्रेन मिल जाए तो वह होगी सबसे बड़ी सौगात

वहीं, इस दौरान सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि संथाल परगना जैसे पिछड़े क्षेत्र को वंदे भारत ट्रेन की सौगात देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री बधाई के पात्र हैं.  लेकिन यहां के लोगों के लिए यह ट्रेन उतना उपयोगी नहीं होगा. इसकी वजह साफ है, यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है.  यहां के लोग गरीब हैं और वंदे भारत ट्रेन का किराया बहुत ज्यादा है. दुमका वासी लंबे समय से दुमका से देश की राजधानी दिल्ली तक के लिए सीधी रेल सेवा की मांग करते आ रहे हैं. उन्होंने जनता की इस आवाज को सदन में उठाने का काम किया है. अगर दुमका-दिल्ली ट्रेन मिल जाए तो वह यहां के लोगों के लिए सबसे बड़ी सौगात होगी.

समर्थक लगाने लगे जिंदाबाद के नारे

इस दौरान मंच जैसे ही राजनीतिक हुआ वैसे ही सभी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता अपने- अपने नेता के समर्थन में जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. आलम यह हुआ कि तमाम वक्ताओं की बातें जिंदाबाद के शोर के बीच दब गई. हालांकि, नलिन सोरेन और निशिकांत दुबे ने माहौल को संभालने का प्रयास किया. लेकिन कार्यकर्ता किसी की भी सुनने के लिए तैयार नहीं हुए.

विकास के लिए दलगत राजनीति से उठना होगा ऊपर

वहीं, गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने माहौल को शांत करने का प्रयास किया. लेकिन समर्थक अपने चहेते नेता के समर्थन में जिंदाबाद के नारे लगाते रहे. शोर के बीच सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि, विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सभी की सहभागिता आवश्यक है. विकास के नाम पर बिहार से अलग झारखंड राज्य बना था. इसके बावजूद वर्ष 2014 तक संथाल परगना प्रमंडल का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया था. जबकि इसी दुमका की धरती ने झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को पहचान दिया. इसलिए इस क्षेत्र के विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी को सोचना होगा. ताकि भविष्य में हमें यह न कहना पड़े की झारखंड के जमशेदपुर का अधिक विकास हुआ, जबकि दुमका पिछड़ा रह गया. उन्होंने वंदे भारत ट्रेन की सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री और रेल मंत्री के प्रति आभार जताया और कहा इससे लोगों को काफी फायदा मिलेगा.

यह खुशी की बात है कि दुमका को वंदे भारत ट्रेन की सौगात मिली. लेकिन रेलवे के मंच को राजनीतिक मंच बनाना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है. वैसे देखा जाए तो नेताओं ने माहौल को संभालने का प्रयास किया. लेकिन समर्थकों का शोर नहीं थमा. सबसे ज्यादा नाराजगी वैसे लोगों को हुई जो इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए वर्ष में भींगते हुए भी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे.

 

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