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धुर्वा में क्यों बेघर कर दिये गए अबतक क़रीब पांच हजार परिवार, क्या है स्मार्ट सिटी प्लान

BY -
Shahroz Quamar
Shahroz Quamar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 7:57:20 PM

रांची (RANCHI): लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में. मशहूर शायर बशीर बद्र का शेर कल सुहानी सांगा समेत कई लोगों के गुस्से को मुखर कर रहा था. दरअसल उनके घर तोड़े जा रहे थे. जिसकी हर ईंट उनके सपने को दफ्न कर रही थी. उनका कहना था कि उन्हें विकास से चिढ़ नहीं, लेकिन उसके लिए विनाश के रास्ते क्यों. युवा पत्रकार विवेक आर्यन कहते हैं, आजादी के बाद एचईसी के क्षेत्र से लगभग 4900 से अधिक परिवार बेघर हुए हैं. उनमें से ब्रिकफील्ड के लोग आखिरी हैं. लगभग 30 परिवार और 300 लोगों के इस गांव की जनसंख्या धीरे-धीरे कम होती गयी. लोग विस्थापित होते गए और कल आखिरी चंद घरों पर भी बुलडोजर चला दिया गया. उनका सवाल है कि रांची के एचईसी में आदिवासियों के घर तोड़े जाने के पीछे के कारणों और बाकी पहलुओं पर चर्चा नहीं हो रही है. इस घटना का फलक आज दिख रहे आंसुओं और जमींदोज हो चुके घर के मलबों से कहीं बड़ा है. लेकिन हम अपने कैमरे में सिर्फ लोंगों का रोना, चीखना, चिल्लाना और बुलडोजर ही कैद कर पा रहे हैं.

 

इनदिनों झारखंड में आदिवासी और मूलवासियों की समस्याओं पर रिसर्च कर रहे विवेक कहते हैं झारखंड में सीएनटी जमीन खनन और उद्योग के लिए ली जा सकती है. लेकिन उद्योग के उद्देश्य से एचईसी द्वारा ली गयी जमीन स्मार्ट सिटी को नियमत: बेची जा सकती है तो आदिवासियों को उनकी जमीने वापस की जानी चाहिए. पता करना चाहिए कि अबतक जिन 4900 परिवारों को यहां से विस्थापित किया गया है, वे कहां हैं, किस हाल में हैं. उनमें से कई तो ब्रिकफील्ड वालों के संपर्क में हैं. यह भी देखा जाना चाहिए कि आदिवासियों को कब-कब नोटिस भेजा गया है, उस नोटिस में क्या लिखा गया है. क्या इस पूरे प्रकरण में एचईसी की भी कुछ जवाबदेही है. क्या सीएनटी जमीन पर स्मार्ट सिटी का निर्माण नियम के अनुकूल है? यदि सबकुछ नियम के अनुसार हो रहा है, और आदिवासी जमीन से आदिवासियों को हटाकर स्मार्ट सिटी का निर्माण तर्कसंगत है, तो झारखंड में आदिवासी जमीन के संरक्षण का ढोंग बंद कर देना चाहिए. फिर बाकी लोगों को भी इजाजत मिलनी चाहिए कि वे आदिवासी जमीन खरीदकर अपने लिए घर बना सकें, जो कि वैसे भी अवैध ढंग से हो ही रहा है.

क्या है स्मार्ट सिटी योजना

रांची के धुर्वा एचईसी इलाके में स्मार्ट सिटी बननी है. इसके लिए 656 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है. इसमें 86.5 एकड़ भूमि पर आवासीय परिसर बनाया जाएगा. यहां बनाई जा रहीं सड़कें 40 मीटर चौड़ी होंगी. स्मार्ट सिटी का मैप, आधुनिक कंट्रोल रूम और राजधानी रांची का कमांड सेंटर तैयार कर लिया गया है. इसके साथ ही बदले मास्टर प्लान में एजुकेशन हब के लिए 58.97 एकड़, होटल के लिए 5-5 एकड़, कॉमर्शियल उपयोग के लिए 6 से 12 एकड़ का उपयोग किये जाने की बात सामने आई है. स्मार्ट सिटी में मंत्रियों के बंगले और सचिवालय भवन का भी निर्माण किया जाएगा.

शुरू से हो रहा विरोध, आज पहुंचे बाबूलाल

इलाके से लोगों को बेघर करने का विरोध शुरू से ही हो रहा है. इसी साल 10 फवरी को प्रभात तारा मैदान के आसपास से अतिक्रमण हटाने गई एचईसी की सीआईएसएफ की टीम पर हमला कर दिया गया था. टीम में शामिल कर्मियों को पीटे जाने की भी खबर मिली थी. वहीं, अतिक्रमण हटाने के लिए ले गयी जेसीबी मशीन को भी पत्थर से मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया था. हालांकि स्मार्ट सिटी योजना केंद्र की ही है. केंद्र में भाजपा सत्तानशीन है. लेकिन पूर्व सीएम और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी आज धुर्वा पहुंचे. सुहानी सांगा से भी मिले. वहीं से रांची डीसी को फोन किया और कहा कि अब अगर घर तोड़ना बंद नहीं हुआ तो वह धरना पर बैठ जाएंगे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व है कि स्मार्ट सिटी में विस्थापित हो रहे परिवारों का पुनर्वास करे. कल जिस प्रकार से रांची में आदिवासियों के घरों को तोड़ा गया वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर इन परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई, तो मैं खुद यहां इन परिवारों के साथ धरने पर बैठूंगा.

 

Tags:News

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