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पलामू में किशुनपुर ओपी को पिकेट बनाए जाने पर फूटा लोगों का गुस्सा, बाजार बंद कर व्यवसायियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 24, 2026, 12:22:06 PM

पलामू (PALAMU): जिले के पाटन प्रखंड स्थित किशुनपुर ओपी को दोबारा पिकेट में बदलने के फैसले के खिलाफ स्थानीय व्यवसायियों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. विरोध में रविवार को किशुनपुर बाजार पूरी तरह बंद रहा. व्यापारियों ने इसे क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए बड़ा झटका बताते हुए प्रशासन के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि किशुनपुर पहले उग्रवाद प्रभावित इलाका माना जाता था. उस दौर में व्यापारी भय के माहौल में कारोबार करते थे और बाजार का विकास लगभग ठप था. वर्ष 2009 में यहां पुलिस पिकेट स्थापित होने के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से व्यापार बढ़ने लगा और इलाके में विकास की रफ्तार तेज हुई.

व्यवसायियों के मुताबिक वर्ष 2018 में किशुनपुर को ओपी का दर्जा मिलने के बाद लोगों में भरोसा बढ़ा और बाजार का तेजी से विस्तार हुआ. मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर दुकानें खुलने लगीं और व्यापारी देर रात तक बिना डर के कारोबार करने लगे. लेकिन हाल ही में अचानक ओपी की जगह फिर से पिकेट लिखा जाने के बाद लोगों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है.

इस मुद्दे को लेकर किशुनपुर देवी मंडप परिसर में पूर्व जिला परिषद सदस्य के नेतृत्व में व्यवसायियों और आम लोगों की बैठक आयोजित की गई. बैठक में प्रशासन के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया. व्यापारियों ने कहा कि पहले वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जाएगी, लेकिन मांगें नहीं मानी गईं तो सड़क जाम और बड़े आंदोलन किए जाएंगे.

व्यवसायियों ने उग्रवाद के पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि पिकेट बनने से पहले इलाके में कई गंभीर घटनाएं हुई थीं. एक निजी चिकित्सक की हत्या तक कर दी गई थी और पुलिस-उग्रवादी मुठभेड़ की घटनाओं से लोग डरे रहते थे. ऐसे हालात दोबारा लौटने की आशंका से लोग चिंतित हैं. पूर्व जिला परिषद सदस्य नंदकुमार राम ने इस मामले को लेकर पलामू डीआईजी किशोर कौशल से मुलाकात भी की. डीआईजी ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है. वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द निर्णय वापस लेने की मांग की है.

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