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कोयला चोरी की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति - क्या कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी पड़ रहा तस्करों का सिंडिकेट !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 10:14:55 PM

धनबाद(DHANBAD) : सवाल बड़ा है कि कोल इंडिया की सहायक कंपनियों को झारखंड में कोयला ब्लॉक से चुनौती मिल रही है या कोयला चोर और तस्करों से. झारखंड सहित बंगाल के 40 जगहों  पर प्रवर्तन निदेशालय की रेड  के बाद धनबाद सहित बंगाल में कोयला चोरी पर चर्चा तेज हो गई है.  बीसीसीएल के सीएमडी  ने तो सार्वजनिक रूप से से स्वीकार कर रहे हैं कि कोयला चोरी हो रही है.  यहां यह बताना जरूरी है कि कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल ही है. बीसीसीएल के सीएमडी कह रहे  है कि कोयला उद्योग संकट में है. कोयले की मांग जितनी होनी चाहिए, नहीं हो रही है. कोयला कंपनियों का डिस्पैच प्रभावित हो गया है. कोयला चोरी हो रही है, अवैध खनन हो रहा है. अवैध खनन से कंपनी को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है. 
 
वित्तीय वर्ष के खत्म होने में अब केवल तीन महीने की देरी 
  
वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब मात्र 3 महीने की देरी है और ऐसे में यह सवाल उठा है.  यह बात सच है कि झारखंड की कोयला कंपनियों का डिस्पैच प्रभावित हुआ है. सवाल किये  जा रहे हैं कि बीसीसीएल के सीएमडी  अचानक कोयला चोरी पर इतने मुखर क्यों हो गए हैं?क्या हालात अब एकदम बेकाबू हो गई है?  कोयला कंपनी और आउटसोर्सिंग कंपनियों की सांठगांठ  कोई नई बात नहीं है.  जिन शर्तों पर आउटसोर्सिंग कंपनियों को काम  दिया जाता है, उसका कभी सुरक्षा ऑडिट नहीं होता. आउटसोर्सिंग कंपनियां कितनी मात्रा में कोयला काटती  है और कितना कोयला, कोयला कंपनी को मिलता है, इसका कभी सतही  आकलन नहीं किया गया.  कोयला चोरी और तस्करी में शामिल लोग तो देखते -देखते "धनपशु" हो गए है.  

क्या कोयलांचल में भी आने वाली है तेज मंदी ?किस ओर हो रहा इशारा 

अब सवाल किये जा रहे है कि क्या बीसीसीएल भी अब ईसीएल  की राह पर चल पड़ी है और अगर ऐसा हुआ तो देश ही नहीं ,दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया को बड़ा झटका लग सकता है.  कोयलांचल की आर्थिक दशा तो बिगड़ेगी  ही, कोल इंडिया भी संकट में पड़ जाएगा. क्योंकि कोकिंग कोल की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी बीसीसीएल ही है. लेकिन अब बीसीसीएल को खरीदार नहीं मिल रहे है. कोयला का स्टॉक बढ़ता जा रहा है. बीसीसीएल पर कोयले की गुणवत्ता खराब देने के भी आरोप  लगते रहे है. सरकारी संस्थान जब यह कह रहे हैं कि एक तो बीसीसीएल का कोयला महंगा है और दूसरा उसकी गुणवत्ता सही नहीं है. तो यह समझना होगा कि क्या इसमें कोई "खेल "है.  इस खेल में बीसीसीएल के निचले स्तर के अधिकारी और आउटसोर्सिंग कंपनियों में क्या कोई सांठगांठ  है? आउटसोर्सिंग कंपनियों से कोयला चोरी की बात अब पर्दे में नहीं रह गई है. सब कुछ जग जाहिर है. 

बीसीसीएल का लगभग 90% कोयला आउटसोर्सिंग कंपनियों के भरोसे 
 
बीसीसीएल का लगभग 90% कोयला आउटसोर्सिंग कंपनियों के भरोसे उत्पादित होता है और आउटसोर्सिंग कंपनियां बीसीसीएल में अपनी समानांतर व्यवस्थाएं चलाती है. कोयला चोरी और तस्करी तो बड़ी समस्या है ही, कोयला चोरी और तस्करी रोकने की दिशा में मैनेजमेंट को जो करना चाहिए, वह आज तक नहीं किया. राजनीति का हस्तक्षेप भी इसका एक बड़ा कारण  हो सकता है.. इधर , अपने कंधे पर सीआईएसएफ का भारी बोझ लेकर कंपनी चलती रही और कोयला चोरी और तस्करी होती रही. अगर कंपनी के सीएमडी सार्वजनिक मंच से कोयला चोरी की बात को स्वीकार कर रहे हैं और उसे रोकने की दिशा में कदम उठाने की "हथजोरी " कर रहे हैं, तो इसका मतलब समझा जा सकता है कि  बीसीसीएल का "पुराना पाप" अब उसी के लिए खतरा बन गया है.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:DhanbadKoylanchalKoyala ChoriBCCLSwikarokti

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