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झरिया की बूढ़ी हड्डियों को दीमक की तरह चाट रहा प्रदूषण, जानिए कैसे जी रही है कोयलांचल की पुरानी झरिया

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 7:28:11 PM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद की झरिया पहले से ही प्रदूषित थी, लेकिन फिलहाल प्रदूषण की रफ्तार बहुत अधिक हो गई है. प्रदूषण के कारण लोग अपना पूरा जीवन भी नहीं जी पा रहे हैं. डॉक्टरों के पास चक्कर लगाते हैं, सांस की बीमारी से पीड़ित रहते हैं, फिर भी झरिया में रहते हैं. झरिया की अपनी विशेषता है. इस शहर की बनावट भी अलग तरह का है. अब तो झरिया पहले की झरिया नहीं रही, लेकिन अभी भी झरिया की बूड्ढी हड्डियों में दम तो है तभी तो झरिया हमेशा किसी ना किसी बहाने चर्चे में रहती है. यह झरिया विधानसभा में भी घुसती है, लोकसभा में भी गुजरती है और इंडिया गेट पर भी अपनी बात कहती है. झरिया की सामाजिक संस्था यूथ कॉन्सेप्ट के संयोजक अखलाक लगातार कई वर्षों से झरिया में प्रदूषण की समस्या को लेकर मुखर रहे हैं.

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भी पंहुचा झरिया का दर्द

चाहे कोई भी धार्मिक त्यौहार हो, राष्ट्रीय पर्व हो या किसी स्वतंत्र सेनानी की जयंती, सभी कार्यक्रमों में प्रदूषण की बढ़ती समस्या की ओर सरकार, जिला प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं. दुर्भाग्य है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और राज्य सरकार इस पर ध्यान नहीं देते. संयोजक ने पिछले दिनों इंडिया गेट पर भी जाकर झरिया की बातों को लोगों तक पहुंचाया. वन एवं मंत्रालय तक पहुंचे, इसी कड़ी में 27 अक्टूबर को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के दिल्ली कार्यालय भी गए और झरिया के दर्द को अधिकारियों को बताया. मंत्रालय ने झरिया के समस्या पर ध्यान देते हुए झारखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सचिव और बीसीसीएल के सीएमडी से जवाब-तलब किया है. साथ ही प्रदूषण की समस्या की जांच करने और उसके उपाय करने को भी कहा है. झरिया और अगल-बगल के इलाकों में अभी पोखरिया खदानों की बहुतायत है.  

असली मालिक तो बीसीसीएल ही है

आउटसोर्सिंग कंपनियां उत्पादन कर रही है लेकिन यहां सवाल उठता है कि आउटसोर्सिंग कंपनियां चाहे जिनकी भी हो, इनकी असली मालिक तो भारत सरकार के लोक क्षेत्रीय प्रतिष्ठान भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ही है.  लेकिन आउटसोर्सिंग कंपनियां किस ढंग से कोयले का उत्पादन कर रही है, इसका कभी आकलन नहीं किया जाता. किस गति से झरिया शहर में प्रदूषण फैल रहा है, जिसका प्रभाव अगल-बगल के इलाकों में भी पहुंच रहा है, इस पर कभी ध्यान नहीं दिया गया. धनबाद के जनप्रतिनिधि भी कोई ध्यान नहीं देते. नतीजा है कि प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों का जीवन कम होता जा रहा है. जो जी रहे हैं वह भी बीमारियों से लड़ रहे हैं. वैसे तो धनबाद झरिया कोयला क्षेत्र में प्रदूषण की बड़ी समस्या है. ढंककर कोयले की ढुलाई, बालू की ढुलाई  करने के भी निर्देश हैं लेकिन इसका पालन तक नहीं होता. लोग कहते हैं कि हमारा कोयला और हम ही परेशानी झेल रहे हैं और लाभ उठा रहे हैं देश के दूसरे प्रदेश. देखना है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पत्र के बाद क्या कुछ सुधार होता है या सब कुछ पुराने ढर्रे पर ही चलता रहेगा.

रिपोर्ट: शाम्भवी सिंह, धनबाद  

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