धनबाद(DHANBAD): बिहार में 2025 में जब चुनाव हो रहा था, तब कांग्रेस या अन्य किसी गठबंधन दल के नेता को झामुमो की याद नहीं आई. अंतिम समय तक झारखंड मुक्ति मोर्चा को अंधेरे में रखा गया. अब असम में चुनाव होने जा रहा है. ऐसे में झारखंड में इंडिया ब्लॉक के सबसे मजबूत दल झामुमो का कांग्रेस को यद् आई है. दरअसल, झामुमो असम चुनाव में गंभीरता दिखा रहा है. मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2 दिन की यात्रा पर असम गए थे. वहां उन्होंने संकेत दिया कि झामुमो चुनाव मजबूती से लड़ेगा. इसके बाद कांग्रेस की ओर से पहल शुरू की गई है. राजनीतिक पंडित असम में झामुमो की सक्रियता इसका कारण बता रहे हैं. राजनीतिक पंडित असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई की रांची में मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के पीछे बड़ी वजह बताई जा रही है.
कांग्रेस अब असम में झामुमो को साथ लेकर चलेगी
दरअसल, कांग्रेस इस चुनाव में झामुमो को साथ लेकर आगे बढ़ने की तैयारी में है. इस मुलाकात के पीछे वजह भी यही बताया जा रहा है. वैसे कांग्रेस ने बंधु तिर्की को असम में पार्टी का सीनियर ऑब्जर्वर बनाया है. बंधु तिर्की ने असम का दौरा कर वहां की स्थिति जान ली है. झामुमो असम में जय भारत पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनावी राजनीति में उतरने के लिए आगे बढ़ रहा है. ऐसे में रांची में गौरव गोगोई से मुलाकात कई मायने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वैसे, रांची में मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात बताया गया है, लेकिन इसकी वजह बहुत खास है. इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि समय के साथ सभी बातें सामने आ जाएंगी. धीरे-धीरे सब कुछ सामने आ जाएगा. चुनावी रणनीति कैसे बनाई जाए ,इस पर चर्चा हुई और लग रहा है कि असम में कुछ अच्छा होगा. इसके लिए रास्ते बनाए जा रहे हैं.
चर्चा तो बातचीत में सीटों के बंटवारे तक की है
चर्चा तो यह भी है कि नेताओं के मुलाकात में रणनीति के साथ-साथ सीटों के बंटवारे पर भी चर्चा हुई. बता दे कि हेमंत सोरेन की सक्रियता को केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, हाल के महीनों में उन्होंने कई राज्यों के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के संकेत दिए हैं. असम की राजनीति में उनकी बढ़ती दिलचस्पी राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी राजनीति को नया स्वर देने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है. रांची में हुई ताजा मुलाकातों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि असम चुनाव से पहले राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल शुरू हो चुकी है और आने वाले महीनों में यह समीकरण और स्पष्ट हो सकते हैं.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो