रांची (RANCHI): झारखंड में चर्चित शराब घोटाले को लेकर सियासी माहौल तेज हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करते हुए राज्य की जांच एजेंसी एसीबी की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं.
मरांडी ने आरोप लगाया है कि एसीबी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने में लगी है. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी ने जानबूझकर साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया में लापरवाही बरती, जिससे आरोपियों को राहत मिली. पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्य आरोपी आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे समेत कई अन्य अधिकारियों को अदालत से डिफॉल्ट बेल मिल गई. इसके पीछे वजह यह बताई गई कि कानून के तहत तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई.
उन्होंने बताया कि संबंधित कानून की धारा के अनुसार 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. इसी का लाभ उठाकर अधिकांश आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं.
मरांडी ने यह भी कहा कि शुरुआत में यह घोटाला करीब 38 करोड़ रुपये का माना जा रहा था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. उन्होंने वर्ष 2022 की उत्पाद नीति में बदलाव को इस पूरे मामले की जड़ बताते हुए इसे सुनियोजित घोटाला करार दिया. पत्र में एक शराब कारोबारी का भी जिक्र करते हुए कहा गया कि उसे ट्रांजिट बेल मिलने के बाद वह फरार हो गया, लेकिन एसीबी उसे पकड़ने में नाकाम रही.
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से मांग की है कि एसीबी को जल्द चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपा जाए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है, जिससे जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से उठता जा रहा है.